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    सिद्धू – कान्हू

    Sidu Kanhu

    सिद्धू – कान्हू 

                    (सिद्धू -1815-1855, कान्हू-1820-1855)

    संथाल परगना के दो वीर भाई, जिन्हें हम सिद्धू – कान्हू मुर्मू के नाम से जानते हैं, अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों को अपने तीर-धनुष के आगे झुकने पर मजबूर कर दि‌या था। सिद्धू -कान्हू ने 1855-56 में ब्रिटिश सत्ता एवं शोषण के खिलाफ एक विद्रोह की शुरूआत की जिसे ‘हुल आंदोलन’ के नाम से जाना जाता है। सिद्धू को अगस्त 1855 को पंचकटिया में बरगद के पेड़ पर फाँसी दी गई जबकि कान्हू को भोगनाडीह में फाँसी दी गई।

       Sidhu-Kanhu

                                           (Sidhu-1815-1855, Kanhu-1820-1855)

    Two brave brothers of Santhal Pargana, whom we know as Sidhu-Kanhu Murmu, forced the modern weapons of the British to bow down before their arrows and bows. Sidhu-Kanhu started a rebellion against British rule and exploitation in 1855-56 which is known as ‘Hul Movement’. Sidhu was hanged on a banyan tree in Panchkatiya in August 1855 while Kanhu was hanged in Bhognadih.