Press Releases:-2021
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27 March 2022
माननीय राज्यपाल ने नेतरहाट दौरे के क्रम में आज शैले भवन एवं कोयल व्यू पॉइन्ट भी अवलोकन किया।
माननीय राज्यपाल ने आज नेतरहाट आवासीय विद्यालय का भ्रमण करने के बाद शैले भवन एवं कोयल व्यू पॉइंट का अवलोकन करते हुए इसकी पृष्ठभूमि व संरचना की जानकारी ली। उन्होंने कोयल व्यू पॉइंट में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि नेतरहाट के बारे में बहुत पहले से सुनता आ रहा हूँ कि यह बहुत अच्छी जगह है, यहाँ स्थापित विद्यालय का पूरे देश मे नाम है। जब मैं यहाँ राज्यपाल के रूप में आया तब से मेरी इच्छा थी कि मैं नेतरहाट जाकर देखूँ कि मैंने जो सुना है, वह कहाँ तक सही है। कल से मैं नेतरहाट में हूँ और देखने योग्य जो भी स्थल है, वहाँ गया। कल हमने सूर्यास्त देखा, आज सूर्योदय देखा तथा नेतरहाट आवासीय विद्यालय जाकर बच्चों से भी बात की।
राज्यपाल महोदय ने कहा कि झारखंड प्रदेश के हर जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, इस क्षेत्र में सिर्फ विकास करने की जरूरत है। झारखण्ड राज्य का राज्यपाल बनने के बाद से ही यहाँ के अधिकारियों से पर्यटन के विकास के संदर्भ में चर्चा की और समयबद्ध होकर विकास करने हेतु निदेशित किया। यहाँ के बाहर के लोगों को यहाँ क्या-क्या है, इसकी पूरी जानकारी नहीं है। मेरे द्वारा धार्मिक, प्राकृतिक टूरिस्ट सर्किट बनाने हेतु निदेश दिया गया ताकि बाहर से आनेवाले पर्यटक को अपनी रुचि व समय के अनुसार भ्रमण कर सकें। ऐसा करने से राज्य में पर्यटन के विकास को गति मिल सकती है।
27 March 2022
मननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस नेतरहाट में सूर्योदय के मनोरम दृश्य का अवलोकन करते हुए
26 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस एवं राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रामबाई बैस सपरिवार नेतरहाट पहुँचे तथा मैग्नोलिया पॉइंट से सूर्यास्त के मनोरम दृश्य को देखा। इससे पूर्व नेतरहाट पहुँचने पर आयुक्त, पलामू प्रमण्डल श्री जटा शंकर चौधरी, पुलिस उप महानिरीक्षक, पलामू श्री राज कुमार लकड़ा, उपायुक्त, लातेहार श्री अबु इमरान, पुलिस अधीक्षक, लातेहार श्री अंजनी अंजन सहित जिला प्रशासन के पदाधिकारियों ने स्वागत किया। राज्यपाल महोदय के अरुणोदय अतिथिशाला पहुँचने पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
26 March 2022
राज भवन, राँची का उद्यान भ्रमण व परिदर्शन करने वाले आगन्तुकों की कुल संख्या 26342 रही। विदित हो कि माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस के निदेश पर दिनांक 21 मार्च से दिनांक 27 मार्च तक राज भवन, राँची का उद्यान आम लोगों के भ्रमण व परिदर्शन हेतु खोला गया है।
25 March 2022
सीमा सुरक्षा बल, हजारीबाग द्वारा आयोजित दीक्षांत परेड के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन:-
 सर्वप्रथम, सीमा सुरक्षा बल के सभी नव आरक्षकों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने हेतु मैं हार्दिक बधाई व शुभकामनायें देता हूँ। सहायक प्रशिक्षण केंद्र, सीमा सुरक्षा बल, हजारीबाग के सभी अधिकारी व जवान भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने आप सभी के प्रशिक्षण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
 आज के इस गौरवमयी क्षण में आप सभी के बीच सम्मिलित होकर स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूँ।
 मुझे बताया गया कि आज के दीक्षांत परेड के कुल 369 नव आरक्षकों ने विभिन्न चुनौतियों से निबटने व राष्ट्र की रक्षा हेतु 44 सप्ताह का कठिन प्रशिक्षण लिया है। ये नव आरक्षक भारत के विभिन्न प्रान्तों के रहने वाले हैं।
 आप चाहे भारत के किसी हिस्से व कोने के रहने वाले हों, आपके लिए भारत माँ की सेवा और इसकी सुरक्षा अहम है। यही बात आपको ट्रेनिंग में भी सिखाई गई होगी। भारत सिर्फ जमीन का टुकड़ा ही नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरुष है। हमें जीना भी है इसके लिए और मरना भी है इसके लिए।
 मुझे आज भव्य परेड को देखने का अवसर मिला, इसके लिए मैं खुद को भाग्यशाली समझता हूँ। एक अनुकरणीय अनुशासन से भरपूर इस परेड के शानदार प्रदर्शन के लिये मैं आप सभी की सराहना करता हूँ।
 आज का दिन सीमा सुरक्षा बल के लिये विशेष है। आज आपने राष्ट्रीय ध्वज के समक्ष एक कर्तव्यनिष्ठ प्रहरी के रूप में देश की सेवा में अपने-आप को समर्पित करने की शपथ ली है। आज आप औपचारिक रूप से देश की प्रथम रक्षा पंक्ति सीमा सुरक्षा बल के महत्वपूर्ण सदस्य बन गये हैं।
 मुझे यह कहते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है कि सीमा सुरक्षा बल का गौरवशाली इतिहास रहा है। हम सभी देशवासियों को आपके शौर्य पर गर्व है।
 सन् 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में इस बल की अहम भूमिका अविस्मरणीय है। इसके जवानों ने अपने अदम्य साहस का अद्वितीय परिचय दिया। इस अवसर पर मैं राष्ट्र की सुरक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले बल के सभी वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
 इस अवसर पर मैं आप लोगों को, आपके माता-पिता एवं परिजनों को बधाई देता देता हूँ जिन्होंने भारत माँ की रक्षा के लिए, मातृभूमि की सेवा के लिए आपको प्रेरित किया। मैं कामना करता हूँ कि आप लोग देश के सच्चे सपूत के रूप में अपनी सभी जिम्मेदारियों का कुशलता से निभाएं।
 मेरे परिवार का भी सेना से गहरा रिश्ता है। मेरे परिवार के लोगों ने भी सेना में अपनी सेवायें दी है। मेरा मानना है कि जीवन जीने की प्रेरणा सेना से सीखना चाहिये। राष्ट्र प्रेम व अनुशासन का जो जज़्बा भारतीय सेनाओं में मिलेगा, वह किसी और से नहीं मिल सकता।
 आपकी कर्त्तव्य भावना, बहादुरी और निष्ठा को नमन है। देश जानता है कि आपका जीवन कठिन है, आपकी राहें कंटीली हैं और आपका जीवन तपस्या व बलिदान की गाथा है। आपका यह त्याग करोड़ों देशवासियों को अमन-चैन प्रदान करता है तथा देश को गर्वित महसूस कराता है।
 राजस्थान की तपती रेत से लेकर गुजरात के रण के दलदली इलाके सहित कश्मीर की बर्फीली चोटियों जैसे जटिल भौगोलिक परिवेश और कठिन से कठिन स्थितियों में भी आप सीमाओं पर निरंतर डटे रहते हैं।
 सीमा पार से होने वाली गोलीबारी हो या फिर विभिन्न वस्तुओं की तस्करी सहित अन्य सीमावर्ती अपराध, देश को नुकसान पहुंचाने वाले देश के दुश्मनों के खिलाफ आप फौलाद की तरह खड़े हैं।
 चुनाव, दंगों इत्यादि सहित प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी आप पूरी तत्परता से देश के साथ खड़े रहते हैं। अपनी वीरता और देश के प्रति समर्पण भाव के कारण इस बल ने जनमानस में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
 एक बार पुनः सभी नव आरक्षकों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ।
जय हिन्द!
24 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से श्री अखिलेश कुमार गुप्ता, उप महानिदेशक, यू.आई.डी.ए.आई. ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की। उक्त अवसर पर सहायक महानिदेशक श्री नीरज कुमार भी मौजूद थे।
24 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से आज जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे. लिंडनर ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
23 March 2022
राज भवन, राँची का उद्यान भ्रमण व परिदर्शन करने वाले आगन्तुकों की कुल संख्या 8477 रही।
22 March 2022
राज भवन, राँची का उद्यान भ्रमण व परिदर्शन करने वाले आगन्तुकों की कुल संख्या 3512 रही। विदित हो कि माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस के निदेश पर दिनांक 21 मार्च से दिनांक 27 मार्च तक राज भवन, राँची का उद्यान आम लोगों के भ्रमण व परिदर्शन हेतु खोला गया है।
21 March 2022
राज भवन, झारखंड में विधान सत्र के उपलक्ष्य में आयोजित रात्रि भोज समारोह में माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस, राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रामबाई बैस, माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन, विधान सभा अध्यक्ष श्री रबीन्द्र नाथ महतो, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यगण, विधायकगण एवं वरीय पदाधिकारीगण।
21 March 2022
राज भवन, राँची का उद्यान भ्रमण व परिदर्शन करने वाले आगन्तुकों की कुल संख्या 2529 रही। विदित हो कि माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस के निदेश पर दिनांक 21 मार्च से दिनांक 27 मार्च तक राज भवन, राँची का उद्यान आम लोगों के भ्रमण व परिदर्शन हेतु खोला गया है।
16 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस सपरिवार 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म देखने हेतु न्यूक्लियस मॉल स्थित पीवीआर लालपुर, राँची पहुँचे एवं दर्शकों के साथ पूरी फिल्म देखी। न्यूक्लियस मॉल पहुँचने पर मॉल के मालिक श्री विष्णु अग्रवाल ने स्वागत किया।
15 March 2022
राजभवन, रांची उद्यान आम नागरिकों के भ्रमण एवं परिदर्शन हेतु दिनांक - 21 मार्च, 2022 से 27 मार्च, 2022 तक प्रतिदिन 10:00 बजे पूर्वाहन से 4:00 बजे अपराह्न तक खोला जाएगा ।
14 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस एवं राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रामबाई बैस ने आज दीपाटोली कैंट, राँची का भ्रमण कर वहाँ मौजूद विभिन्न सैन्य हथियारों का अवलोकन किया। उक्त अवसर पर सैन्य अधिकारियों व जवानों द्वारा कैंट में मौजूद विभिन्न सैन्य हथियारों की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए राष्ट्र की सुरक्षा हेतु लाये जा रहे उपयोगों के संदर्भ में जानकारी प्रदान की गई। राज्यपाल महोदय ने कहा कि भारत के हर नागरिक को अपने सैनिकों के अदम्य साहस व वीरता पर गर्व है।
12 March 2022
राँची विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित उत्तर दक्षिण संगीत समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन:-
Ø राँची विश्वविद्यालय का एक सामुदायिक रेडियो स्टेशन रेडियो खाँची 90.4 एफ.एम. एवं पायोनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसायटी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित इस उत्तर दक्षिण संगीत समारोह में आप सबके बीच आकर अपार खुशी हो रही है।
Ø सर्वप्रथम, इस अवसर पर स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर जी के प्रति श्रद्धा-सुमन अर्पित करना चाहूँगा, जो अब हमारे बीच नहीं रही। लता जी ने अपने गायन से पूरे विश्व में अमिट पहचान स्थापित की। भारतीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को सदा याद किया जायेगा। उनकी सुरीली आवाज हमेशा हमारे कानों में गूँजती रहेगी।
Ø इस अवसर पर अपनी अनूठी आवाज़ व अंदाज से पूरे विश्व में एक विशिष्ट व अलग पहचान बनाने वाले मशहूर गायक एवं संगीतकार बप्पी लाहिड़ी जी के प्रति भी श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ।
Ø मुझे बताया गया कि रेडियो खाँची ने इसी 8 मार्च को न सिर्फ अपने स्थापना के 2 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे किये, बल्कि कोरोना महामारी में सक्रिय भूमिका भी निभाई। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को 1600 से अधिक ऑडियो लेक्चर प्रस्तुत कर रेडियो के महत्व को परिभाषित किया है, इसके लिए डॉ० कामिनी कुमार को विशेष रूप से बधाई देता हूँ कि उन्होंने छात्रहित में रेडियो खाँची का सदुपयोग किया।
Ø हर्ष का विषय है कि पायोनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसायटी, नई दिल्ली पिछले 11 वर्षों से पूरे देश में उत्तर दक्षिण संगीत समारोह का आयोजन करती आ रही है।
Ø भारतीय संगीत का मूल स्रोत वेदों को माना जाता है। इसका इतिहास ईश्वरीय परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने देवर्षि नारद मुनि को संगीत वरदान में दिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्माण्ड में सुनाई देने वाली पहली ध्वनि ॐ मंत्र है। भारतीय महाकाव्यों की रचना में भी संगीत का प्रभाव रहा है।
Ø भारतवर्ष की सारी सभ्यताओं में संगीत का बड़ा महत्व रहा है। धार्मिक एवं सामाजिक परंपराओं में संगीत का प्रचलन प्राचीन काल से रहा है। इस रूप में, संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा मानी जाती है। वैदिक काल में अध्यात्मिक संगीत को मार्गी तथा लोक संगीत को 'देशी' कहा जाता था। कालांतर में यही शास्त्रीय और लोक संगीत के रूप में दिखता है।
Ø भारत में वाद्य यंत्रों में भी बहुत प्राचीनता है और इसे एक दिव्य उत्पत्ति भी कहा जा सकता है। अधिकांश देवी-देवताओं को एक यंत्र से दर्शाया गया है। जैसे भगवान गणेश शंख धारण करते हैं, भगवान शिव डमरू धारण करते हैं और भगवान कृष्ण बांसुरी और माँ सरस्वती वीणा धारण करती हैं।
Ø भारतीय संगीत का इतिहास इस सत्य को उजागर करता है कि धीरे-धीरे इसके आकार और रूप में बदलाव आया। शुरुआत में संगीत सामग्री में भक्ति थी एवं धार्मिक अनुष्ठानिक उद्देश्यों तक सीमित थी और केवल मंदिरों में इसका उपयोग किया जाता था। धीरे-धीरे सभी प्रकार की विशेषताओं व विभिन्नताओं वाला संगीत हुआ।
Ø प्राचीन काल से ही हमारे देश की संगीत की समृद्ध परंपरा रही है। प्राचीन काल मंा सम्पूर्ण भारत में संगीत की केवल एक पद्धति थी, किन्तु आज हम देखते हैं कि संगीत की दो पद्धतियाँ हो गयी हैं।
Ø उत्तर भारतीय संगीत, भारत के अधिकतर भागों में पद्धति प्रचलित है, इस पद्धति के नाम से ही यह स्पष्ट होता है कि यह उत्तर भारत में अधिक प्रचलन में है और दूसरा दक्षिण भारतीय संगीत पद्धति, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है कि यही दक्षिण भारतीय राज्यों में अधिक प्रचिलित है।
Ø हिन्दुस्तानी शास्त्राीय संगीत मूल रूप से गायन प्रधान रहा है। यह तथ्य हमें स्वयं ‘संगीत’ शब्द से ही ज्ञात हो जाता है, जिसका अर्थ है- ‘सम्यक रूप से गायन’। संगीत दो शब्दों के मेल से बना है सम् जोड़ गीत। सम् का अर्थ है सम्पूर्ण या सम्यक् और गीत का अर्थ है - गायन। दोनों को मिलाकर इसका अर्थ बनता है – सम्पूर्ण गायन।
Ø संगीत हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है। संगीत केवल मनोरंजन का ही जरिया नहीं है, बल्कि इसके कई सारे फायदे हैं। अब संगीत का प्रयोग वैज्ञानिक अनेक रोगों के उपचार के लिए भी कर रहे हैं। अनेक वैज्ञानिक शोध ने इस बात को सिद्ध किया है कि संगीत सुनने से मानसिक लाभ होते हैं, तनाव कम होता है।
Ø आज कल हर इंसान की जिंदगी दौड़-धूप से भरी रहती है। काम करते-करते हम बुरी तरह से थक जाते हैं। जब संगीत सुनते हैं तो हमारी थकान मिट जाती है। हमारे दिमाग में नई ऊर्जा का संचार होता है और हम अच्छा महसूस करते हैं।
Ø संगीत सुनने से मस्तिष्क को आराम मिलता है, जहां पर कई बार दवाएं काम नहीं करती हैं। वहां म्यूजिक थैरेपी काम करती है।
Ø अच्छे संगीत सुनने से दिमाग के अंदर चल रहे अनचाहे विचारों को विराम मिलता है। यह नींद संबंधी बीमारी को भी दूर करता है।
Ø एक प्रसंग है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इंग्लैंड के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को अनिद्रा की शिकायत हो गई। उन्हें बताया गया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत में अनिद्रा ही नहीं बल्कि अन्य कई बीमारियों का इलाज संभव है, उन्होंने इसे अपनाया और पाया गया कि शास्त्रीय गायन से चर्चिल को नींद आ जाती थी।
Ø कहने का मतलब यह है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत जिसमें भारत के सभी क्षेत्रों के संगीत को हम शामिल करते हैं, में बड़ी ताकत है।
Ø इस प्रकार संगीत बहुत ही शक्तिशाली माध्यम है और सभी तक काफी सकारात्मक संदेश पहुँचाता है।
Ø भारत के उत्तरी तथा दक्षिणी भागों की शास्त्रीय संगीत का संगम है, आज का यह उत्तर दक्षिण संगीत समारोह।
Ø एक बार पुन: मैं इस आयोजन के लिए रेडियो खाँची, रांची विश्वविद्यालय, रांची तथा द पायनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसाइटी, नई दिल्ली को हार्दिक बधाई देता हूँ तथा सभी कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
जय हिन्द! जय झारखंड!
11 March 2022
होटल प्रबंधन संस्थान, रांची द्वारा "पलाश" (“Promotion and Advertising of Leisure Activities for Sustainability of Hospitality”) विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय के सम्बोधन:-
 होटल प्रबंधन संस्थान, राँची द्वारा यात्रा, पर्यटन, आतिथ्य एवं संस्कृति-2022 पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में आप सभी के बीच आकर मुझे अपार खुशी हो रही है।
 मुझे बताया गया कि होटल प्रबंधन संस्थान, राँची एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है जो पर्यटन क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं की दिशा में समर्पित है। यह संस्थान अपनी स्थापना के बाद से आतिथ्य और होटल प्रशासन के ज्ञान को बढ़ावा देने, उसे प्रसार करने तथा व्यावसायिक शिक्षा एवं ज्ञान के उच्च स्तर को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
 भारत की संस्कृति व सभ्यता संपूर्ण विश्व में सराही जाती है। हमारी सांस्कृतिक कलाओं की पूरे विश्व में एक पहचान है। चाहें वो अहिंसा का नारा हो या फिर वसुधैव कुटुम्बकम (संपूर्ण विश्व हमारा परिवार है) हो, इन सभी विचारों ने हमारी ही पावन माटी में जन्म लिया है।
 आतिथ्य का हमारे समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान है। हमारे दर्शन में "अतिथि देवो भवः" का उल्लेख है, जिसका अर्थ है "अतिथि भगवान होता है"। "अतिथि देवो भवः" हमारे देश की उन सशक्त विचारों में से है जो हमारे देश के नैतिक मूल्यों को और भी प्रबल बनाते हैं। भारत में पर्यटन के विकास में इस भाव व दृष्टि का अहम योगदान रहा है।
 पर्यटन आज विश्व का अहम उद्योग और आर्थिक अंग बन गया है। इसे आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन का सशक्त साधन माना गया है। हमारे देश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर, उसे पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध बनाती है।
 आज भारत विभिन्न श्रेणी के पर्यटन के लिए जाना जाता है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्टता और संस्कृति है। यहाँ के विभिन्न क्षेत्र अपने मौसम, नदियों, वन, द्वीपों, पर्वत व पठारों आदि प्राकृतिक विशेषताओं से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। साथ ही यहाँ पाये जाने वाली विविधता और सांस्कृतिक विरासत विदेश से आने वाले पर्यटकों के आकर्षण के अहम केंद्र हैं।
 हमारा देश धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यन्त समृद्ध है। यहाँ बड़ी संख्या में विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल होने के साथ विभिन्न धर्मों के प्रवर्त्तकों की जन्मस्थली भी है, जिससे अन्य एशियाई देशों के पर्यटक काफी संख्या में आते हैं।
 पर्यटन की सफलता सुविधाओं के विकास पर भी निर्भर करती है, साथ ही जनता का पर्यटकों के प्रति व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जनता का आथित्य और शिष्टता पर्यटकों को आकर्षित करती है।
 पर्यटन आदिकाल से ही मनुष्यों का स्वाभाव रहा है। आधुनिक युग में पर्यटन संबंधी सभी मिथ्या समाप्त होने तथा आवागमन के साधनों के क्षेत्र में आए भारी बदलावों के कारण पर्यटन एक व्यवसाय के रूप में देखा जाता है।
 आधुनिक युग में पर्यटन को एक व्यवसाय का रूप देने में लोगों की बढ़ती आर्थिक समृद्धि का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है।
 विभिन्न देशों के लोग दुनिया के अन्य देशों में जाकर वहाँ की सभ्यता और संस्कृति को निकट से देखने-समझने का प्रयास करते हैं। अनेक लोग देश के प्रमुख स्थलों की यात्रा कर देश के पर्यटन उद्योग को सम्पन्न बनाने में योगदान देते हैं।
 हम सब जानते हैं कि झारखंड राज्य में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। हमारा राज्य प्राकृतिक दृष्टिकोण से अत्यन्त समृद्ध और भाग्यशाली है। यह राज्य के विकास व राजस्व में अहम भूमिका का निर्वाह कर सकता है। हमें इसे और विकसित करने की आवश्यकता है। राज्य में अपेक्षित गति से पर्यटन का विकास नहीं हुआ है। इसमें हम सभी को योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की जरूरत है। पर्यटकों को सुविधाएं उपलब्ध कराना होगा ताकि राज्य के पर्यटन स्थलों की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर हो और लोग यहाँ आने के प्रति अधिक-से-अधिक आकर्षित हो।
 झारखंड प्रदेश भारत ही नहीं, विश्व के लिए भी एतिहासिक है। झारखंड के पठार, पर्वत हिमालय से भी पुराना है। मैंने सचिव, पर्यटन से झारखंड में पर्यटन के क्षेत्र में हुए कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बिहार में जिस प्रकार बुद्धिस्ट सर्किट है, उसी तरह इस राज्य में भी धार्मिक एवं प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर महत्वपूर्ण जगहों का सर्किट बनाया जा सकता है।
 आज का जमाना मार्केटिंग और पब्लिसिटी का है। साहेबगंज में फॉसिल्स पार्क है जो करोड़ों साल पुराना है जिसे हम अब तक राष्ट्रीय स्तर पर नहीं ले जा सके हैं।
 झारखंड राज्य के धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों पर बुकलेट तैयार प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।
 मैं पर्यटन स्थलों में जाने के लिए इच्छुक रहता हूँ। जिस देश में प्राकृतिक सौंदर्य नहीं है, वहाँ भी कृत्रिम रूप से विकास कर पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण बनाया जा सकता है।
 इस सम्मेलन का उद्देश्य यात्रा, पर्यटन, आतिथ्य और संस्कृति से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श करने के लिए पर्यटन और आतिथ्य के शोधकर्ताओं को एक साथ लाना है। सम्मेलन पर्यटन क्षेत्र में वर्तमान और उभरती चुनौतियों और मुद्दों को देखते हुए इन पर रूपरेखा तैयार करेगा।
 मुझे पूरी आशा है कि इस सम्मेलन में सार्थक चर्चा होगी, रचनात्मक परिणाम सामने आयेंगे और कुछ ठोस सुझावों तक पहुँचने में मदद मिलेगी, जिससे नीति-निर्माताओं को देश में पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के विकास को और बढ़ावा मिलेगा। मैं सम्मेलन की सफलता की कामना करता हूँ।
जय हिन्द! जय झारखंड !
10 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने एसोसियेशन फॉर अडवोकेसी एंड लीगल इंसेंटिव्स ट्रस्ट (आली) द्वारा होटल बीएनआर चाणक्या में ‘बाल विवाह’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में भाग लिया राज्यपाल महोदय ने बाल विवाह उन्मूलन हेतु आली संस्था से जुड़कर कार्य करने वाली तीन बालिकाओं श्वेता कुमारी, पलामू, सपना कुमारी, गढ़वा एवं गीता कुमारी, देवघर को 2-2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।
‘बेटा-बेटी एक समान’, हमारा मंत्र होना चाहिये।-माननीय राज्यपाल अगर समाज शिक्षित हो जाएगा तो बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई अपने-आप ही समाप्त हो जायेगी।
बाल विवाह जैसी कुप्रथा को दूर करने के लिये समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होने की आवश्यकता है।
एसोसियेशन फॉर अडवोकेसी एंड लीगल इंसेंटिव्स ट्रस्ट (आली) द्वारा ‘बाल विवाह’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में माननीय राज्यपाल महोदय के सम्बोधन के मुख्य बिन्दु:-
 आली द्वारा ‘बाल विवाह’ जैसे गंभीर विषय पर आयोजित इस परिचर्चा कार्यक्रम में मुझे आप सभी के बीच आकर अपार खुशी हो रही है।
 बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है जो किसी परिवार या किसी बालिका के लिए व्यक्तिगत दंश तो है ही, समग्र समाज की उन्नति में भी बाधक है। दुनिया के हर शिक्षित और सभ्य समाज में बाल विवाह को एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जाता है।
 बाल विवाह के मुख्य कारण आयु घटक, असुरक्षा, शिक्षा व समाजीकरण का आभाव, महिला सशक्तिकरण में बाधा, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे इत्यादि हैं।
 बाल विवाह बेहद चिंताजनक कुरीति व अभिशाप है, जो बचपन खत्मि कर देता है और खासकर लड़कियों की ज़िंदगी को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यह बच्चोंै की शिक्षा, स्वांस्य्रभ और संरक्षण पर नकारात्मदक प्रभाव डालता है। बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी पड़ता है।
 जब किसी की शादी कम उम्र में होती है, अक्सर उसके स्कूजल से ड्रॉप-आउट अथवा निकल जाने की संभावना बढ़ जाती है। खुद नाबालिग होते हुए भी वे संतान को जन्म देती हैं। कम उम्र में लड़कियों के माँ बनने से माँ और बच्चे, दोनों के जीवन को खतरा होता है।
 मुझे कहते हुए बहुत पीड़ा हो रही है कि जिन लड़कियों की उम्र पढ़ने एवं खेलने की होती है, समाज की गलत सोच के कारण उनको शादी के बंधन में बाँध दिया जाता है। विडम्बना है कि यह निंदनीय प्रथा देश के प्रायः सभी राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में, बिना किसी रोक-थाम के प्रचलन में है।
 शिक्षा का अधिकार अधिनियम 14 वर्ष की आयु तक शिक्षा को निःशुल्क और अनिवार्य बनाता है। शोध से ज्ञात होता है कि यदि किसी बच्चे को 15 वर्ष की आयु में स्कूल छोड़ना पड़ता है तो कम उम्र में उसकी शादी होने की संभावना काफी प्रबल हो जाती है।
 घरेलू जिम्मेदारियों के कारण प्रायः बाल वधुओं को अपनी शिक्षा छोड़नी पड़ती है। ऐसा माना जाता है कि यदि घर की महिला शिक्षित होती है तो वह अपने पूरे परिवार को शिक्षित करती है।
 चूँकि बाल वधू अपनी शिक्षा पूरी करने में सक्षम नहीं होती हैं, वह प्रायः परिवार के अन्य सदस्यों पर आश्रित रहती है, जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ी बाधा है।
 हर परिवार चाहता है कि उन्हें बहु पढ़ी-लिखी मिले, लेकिन बेटियों को पढ़ाने को तैयार नहीं है। अगर हम बेटी को पढ़ा नहीं सकते तो शिक्षित बहु की उम्मीद करना अनुचित है।
 आप सब जानते हैं कि महिलाओं को उचित अवसर प्राप्त होने पर उन्होंने अपनी प्रतिभा एवं कार्यों से पूरे राष्ट्र को गौरवान्वित किया है। हम सभी को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है।
 अगर समाज शिक्षित हो जाएगा तो बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई अपने-आप ही समाप्त हो जायेगी। बाल विवाह जैसी कुप्रथा को दूर करने के लिये समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होने की आवश्यकता है।
 देश में बाल विवाह के खिलाफ कानून एक शक्तिशाली तंत्र है, शादी के लिए वैध उम्र की सीमा तय है। बाल विवाह को रोकने के लिए सरकार और नागरिक संगठनों को मिलकर काम करने की जरूरत है। जन-सहयोग के बिना बाल विवाह जैसी कुप्रथा व समाज को हानि पहुंचाने वाली अनुचित रीति का अंत संभव नहीं है।
 बालिकाओं के सशक्तीकरण के लिए बेहद जरूरी है कि उनका विवाह कानूनी उम्र के बाद हो, उनके स्वास्थ्य एवं पोषण की दिशा में ध्यान दिया जाय, वे शिक्षा हासिल करें और उनके अंदर निहित हुनरों का विकास हो।
 वर्ष 1929 का बाल विवाह निरोधक अधिनियम भारत में बाल विवाह की कुप्रथा को प्रतिबंधित करता है।
 विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत महिलाओं और पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु क्रमशः 18 वर्ष और 21 वर्ष निर्धारित की गई।
 बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 को बाल विवाह निरोधक अधिनियम (1929) की कमियों को दूर करने के लिए लागू किया गया था।
 भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता, भेदभाव रहित और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। बाल विवाह इन अधिकारों का पूरी तरह हनन करता है। एक आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2020 से जून 2020 के बीच लॉक डाउन के पहले चार महीनों में भारत में बाल विवाह के कुल 5,214 मामले दर्ज हुए।
 इस सामाजिक कुरीति का कारण दहेज-प्रथा व लड़कियों के प्रति कुछ लोगों में गलत सामाजिक सोच भी है। इस तथ्य के बावजूद कि भारत में दहेज को पाँच दशक पूर्व ही प्रतिबंधित कर दिया गया है, दूल्हे या उसके परिवार द्वारा दहेज की मांग करना एक आम प्रथा बनी हुई है।
 ‘बेटा-बेटी एक समान’, हमारा मंत्र होना चाहिये। सबको समझना होगा कि ‘बेटी जन्म नहीं लेगी, तो बहु कहाँ से आयेगी।‘ इसलिए हर किसी को सामूहिक जिम्मेदारी के साथ संवेदनशील एवं जागरूक होना होगा।
 बाल विवाह का बाल वधुओं के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है, क्योंकि वे न तो शारीरिक रूप और न ही मानसिक रूप से किसी की पत्नी अथवा किसी की माता बनने के लिए तैयार नहीं होती हैं।
 शोध के मुताबिक, 15 वर्ष से कम आयु की लड़कियों में मातृ मृत्यु का जोखिम सबसे अधिक रहता है।
 इसके अलावा बाल वधुओं पर हृदयघात, मधुमेह, कैंसर और स्ट्रोक आदि का खतरा 23 प्रतिशत अधिक होता है। साथ ही वे मानसिक विकारों के प्रति भी काफी संवेदनशील होती हैं।
 बाल विवाह जैसी कुप्रथा का उन्मूलन सतत विकास लक्ष्य-5 का हिस्सा है। यह लैंगिक समानता प्राप्त करने तथा सभी महिलाओं एवं लड़कियों को सशक्त बनाने से संबंधित है।
 लड़कियों को प्रायः सीमित आर्थिक भूमिका में देखा जाता है। महिलाओं का काम घर तक ही सीमित रहता है और उसे भी कोई विशेष महत्व नहीं दिया जाता है।
 कम आयु में विवाह करने वाले बच्चे प्रायः विवाह के दायित्वों को समझने में असमर्थ होते हैं जिसके कारण प्रायः परिवार के सदस्यों के बीच समन्वय का अभाव देखा जाता है।
 कम आयु में विवाह करने से लड़कियाँ अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित हो जाती हैं। ‘बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन’ में उल्लिखित बुनियादी अधिकारों में शिक्षा का अधिकार और यौन शोषण से सुरक्षा का अधिकार आदि शामिल हैं।
 मुझे खुशी है कि आज का यह कार्यक्रम ‘बाल विवाह’ जैसे गंभीर व महत्वपूर्ण विषय पर है। यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि हमारे राज्य मंं बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन के लिए युवतियाँ इस अभियान का नेतृत्व कर रही हैं, इस प्रकार के मुहिम की मैं सराहना करता हूँ।
 बाल विवाह को रोकने के लिए एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। बालिकाओं को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है। रूढ़िवादी सोच को जड़ से ख़त्म कर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि विभिन्न अधिकारों के प्रति लड़कियों को भी जागरूक करना होगा।
 मैं मानता हूँ कि राज्य में ऐसी बातें होती हैं कि अपराध होता है परंतु प्राथमिकी दर्ज नहीं होता है, टालने की कोशिश होती है। मैं राज्य में आने के बाद प्रशासन में चुस्ती लाने का प्रयास कर रहा हूँ। मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक को बुलाकर निरंतर परामर्श देता हूँ। मैंने थाना में प्राथमिकी दर्ज नहीं करने वाले अधिकारियों को निलंबित करने हेतु कहा है।
 राज्य के विकास के प्रति मैं प्रतिबद्ध हूँ। मैं राज्य के विकास हेतु विभिन्न अधिकारियों को समय-समय बुलाकर उनका निरंतर मार्गदर्शन करता हूँ।
 एक बार पुनः आली को इस प्रकार के कार्यक्रम के आयोजन हेतु बधाई व शुभकामनाएं।
जय हिन्द! जय झारखण्ड!
09 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की कार्यवाहक अध्यक्ष सैयद शहजादी ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
08 March 2022
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी महिलाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं तथा समाज व राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका का निर्वहन कर रही हैं। एक सशक्त समाज की दिशा में नारी शक्ति के सदा सम्मान का सभी संकल्प लें।
07 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस द्वारा राज भवन में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मुकुल नारायण देव तथा सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सोनाझरिया मिंज को कर्नल की मानद उपाधि से सम्मानित किया। इसके साथ ही दोनों कुलपति को अपने-अपने विश्वविद्यालय के अंतर्गत एन.सी.सी. ऑफिसर एवं कैडेट्स के लिए कर्नल कमांडेंट के पद पर नियुक्त किया गया।
विदित हो कि रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से चयनित उन कुलपतियों को ही मानद कर्नल की उपाधि दी जाती है जिन्होंने एनसीसी के विस्तार एवं उत्थान के लिए अपने विश्वविद्यालय में विशेष योगदान दिया है। इन कुलपतियों ने अपने विश्वविद्यालय एनसीसी कैडेट्स का उचित प्रोत्साहित कने का कार्य किया। इनके इन कार्यों को देखते हुए एनसीसी महानिदेशक की अनुशंसा पर भारत सरकार ने उन्हें कर्नल की मानद उपाधि से सम्मानित करने का निर्णय लिया। समारोह में एनसीसी के वायु सेना एवं नौसेना अंग के कैडेट्स ने कई हवाई जहाज एवं समुद्री जहाज के मॉडल्स का भी प्रदर्शन किया। इस अवसर पर बिहार और झारखंड के एनसीसी के अपर महानिदेशक मेजर जनरल इंद्र बालन भी थे l
06 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने निमित्त संस्था द्वारा खूंटी में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।
हमारे समाज में किसी जोड़ी की शादी होने पर ही सामाजिक मान्यता प्रदान की जाती है-माननीय राज्यपाल हमारे समाज में किसी गरीब की शादी करना बहुत बड़ा पुण्य है। डॉ. निकिता सिन्हा बहुत बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने इतने सारे पुण्य हासिल किये।-माननीय राज्यपाल माननीय राज्यपाल महोदय ने खूंटी जिला में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला, जो कमड़ टूट जाने के कारण इस सामूहिक विवाह में विवाह नहीं कर सकी, की जानकारी प्राप्त होने पर उक्त महिला के इलाज हेतु उपायुक्त, खूँटी को पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सहायता करने का निर्देश दिया।
माननीय राज्यपाल महोदय के संबोधन के मुख्य बिन्दु:-
 प्रसिद्ध स्वयंसेवी संस्था निमित्त द्वारा खूंटी में आयोजित इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आप सभी से जुड़कर अपार खुशी हो रही है। इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु डॉ० निकिता सिन्हा एवं उनकी पूरी टीम को मैं बधाई देता हूँ।
 इस अवसर पर सभी नवविवाहित जोड़ी को हार्दिक बधाई व शुभकामनायें देता हूँ एवं उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करता हूँ।
 मुझे बताया गया कि झारखंड के कई क्षेत्रों में कुछ कारणवश लिव-इन संबंध व्यापक रूप से प्रचलित है।
 झारखंड की संस्कृति अत्यन्त समृद्ध व गौरवशाली है। विश्व स्तर पर इसकी विशिष्ट पहचान है। प्रकृति के प्रति प्रेम, सामूहिकता की भावना अनुकरणीय है और इसकी मिशाल दी जाती है। लेकिन हमारे समक्ष आज भी कुछ सामाजिक समस्याएँ मौजूद हैं, जिनका निदान करना आवश्यक है।
 मुझे आश्चर्य हो रहा है कि बहुत-से युगल गरीबी के कारण विवाह के बिना लिव-इन में रहते हैं। स्थानीय रीतियों के अनुसार विवाह कार्यक्रम 3 से 5 दिन तक चलता है और इसमें भोज देने की भी व्यवस्था होती है।
 मैं यहाँ यह कहने में कतई संकोच नहीं करूँगा कि भोज देने की बाध्यता नहीं होनी चाहिये, ये अपनी इच्छा व सामर्थ्य के अनुसार दिया जाना चाहिये।
 शादियों में खर्चा होने के कारण लड़का-लड़की विवाह के बिना घर में एक साथ पति-पत्नी के जैसे रहते हैं, उनसे संतान भी होता है, जिसके पास किसी भी तरह का अधिकार नहीं होता है। विडम्बना है कि महिलाओं को ‘ढुकु’ से संबोधित किया जाता है।
 मुझे यह जानकर बहुत दुःख हो रहा है कि इन महिलाओं को सार्वजनिक कुएँ व हैंडपंप से पानी भरने में भी कठिनाई होती है। कई समुदाय में लड़कियों का कान छिदवाना एक महत्वपूर्ण संस्कार है, इसे नहीं करने दिया जाता है। महिलाएँ और बच्चे जरूरी दस्तावेज़ के अभाव में सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
 मुझे यह भी बताया गया कि इस प्रकार के युगलों की एक बड़ी आबादी है। ऐसे में, मैं डॉ० निकिता सिन्हा को हार्दिक बधाई देता हूँ कि जिन्होंने अपनी व्यापक सोच को दर्शाते हुए इस बड़ी सामाजिक समस्या के निदान हेतु यह क्रांतिकारी कदम उठाया। मैं चाहूँगा कि इस बड़ी सामाजिक समस्या के निदान हेतु उनकी सक्रियता बनी रहे।
 खुशी की बात है कि डॉ० निकिता सिन्हा इस सामाजिक समस्या को समाप्त करने हेतु तेजी से काम कर रही है। इस क्रम में उनके द्वारा लगभग 5 वर्षों से सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन कर ऐसे युगलों का पूरे रीति-रिवाज से विवाह किया जाता है।
 कल भी उनके द्वारा 250 से अधिक युगलों की रीति-रिवाज से शादी कराई गई और आज 170 से अधिक जोड़ों की शादी हुई है। इस वर्ष अभी तक 1300 से अधिक जोड़ों की शादी कराई जा चुकी है। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
 मुझे यह भी जानकारी दी गई कि आपकी संस्था द्वारा राँची, बसिया, गुमला के साथ खूंटी में पहले भी ऐसे सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया जा चुका है।
 जिस प्रकार समाज से छुआछूत, डायन-प्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को दूर करना आवश्यक है, उसी प्रकार इस सामाजिक समस्या को भी दूर करना जरूरी है।
 यदि इस सामाजिक समस्या का एक प्रमुख कारण जातीय जटिलताएं हैं तो उस दिशा में भी आप लोगों को गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिये।
 मैं इस क्रम में आपकी समस्याओं को भी समझ सकता हूँ। ऐसे युगलों को चिन्हित करना तथा उन्हें रीति-रिवाज से विवाह की सामाजिक मान्यता प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ना एक चुनौती है। लेकिन आपने जो एक संकल्प लिया है, उस पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहिये।
 आप इस प्रकार के युगुलों को चिन्हित करें एवं उनकी रीति-रिवाज से विवाह कराएं ताकि उनके वंशज उनके कारण हीन भावना के शिकार न हो। इस दिशा में आगे भी तीव्र गति से कार्य करते हुए इस गंभीर सामाजिक समस्या के निदान में संवाहक बनकर समाजसेवा की दिशा में अन्य महिलाओं के लिए भी रोल मॉडल बनें।
 आशा है कि आप जैसी ऊर्जावान समाजसेवी के प्रयासों से गरीबी या जातिवाद के कारण जो लड़का-लड़की अभी लिव-इन में रह रहे हैं, वे शादी के बंधन में बंधकर सम्मानजनक जीवन जी सकें।
 मेरा मानना है कि समाज में मौजूद इस प्रकार की समस्याओं का निदान जरूरी है। इसके लिए एक कोषांग बनाया जा सकता है एवं ऐसे युगलों को चिन्हित कर पंचायत या ग्राम स्तर पर शादी समारोह का आयोजन कर इन्हें सामाजिक मान्यता प्रदान की जा सकती है।
 ऐसे लोगों के लिए जिला प्रशासन को भी सक्रियता से आगे आना होगा। वे ऐसे युगलों को चिन्हित कर राज्य में संचालित कन्यादान योजना से लाभान्वित करें तथा अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ प्रदान करें।
 जिला प्रशासन इन सभी युगलों का राशनकार्ड एवं अन्य सरकारी पहचान पत्र अप-टू-डेट करने के साथ उनके बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनाने का शीघ्रता से कार्य करें।
 ऐसे जनजातीय युगलों को हम सरकार द्वारा संचालित आजीविका कार्यक्रम तथा कौशल विकास कार्यक्रम के जरिये सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त कर सकते हैं।
 एक बार पुनः सभी नवविवाहितों को बधाई। आप सभी के सुखद वैवाहिक जीवन हेतु मेरी शुभकामनायें हमेशा साथ है।
जय हिन्द! जय झारखंड!
06 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस एवं जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल श्री मनोज सिन्हा राज भवन, राँची में भेंट करते हुए |
03 March 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से राज्य के वित्त मंत्री श्री रामेश्वर उराँव ने राज भवन में भेंट कर राज्य के बजट की प्रति समर्पित करते हुए सरकार द्वारा बजट में किये गये उपबंधों के संदर्भ में अवगत कराया। इस अवसर पर प्रधान सचिव, वित्त विभाग श्री अजय कुमार सिंह भी मौजूद थे।