- Rajbhawan
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26 June 2022
खूँटी में जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “अबुआ बुगिन स्वास्थ्य” (हमारा बेहतर स्वास्थ्य) कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित “स्वास्थ्य मेला” के अवसर माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन:-
जोहार!  धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की इस पावन भूमि पर जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “अबुआ बुगिन स्वास्थ्य” (हमारा बेहतर स्वास्थ्य) कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस “स्वास्थ्य मेला” में आप सभी के बीच आकर अपार खुशी हो रही है। इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए मैं जनजातीय कार्य मंत्री, भारत सरकार श्री अर्जुन मुंडा जी को हार्दिक बधाई देता हूँ।
 इस माटी के सपूत के साहस, त्याग व बलिदान की गाथा की पूरे विश्व में ख्याति है। हमारे देश के स्वतंत्रता आंदोलन में इन्होंने लोगों को प्रेरित करने का कार्य किया। हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।
 जनजातीय समुदाय का गौरवशाली इतिहास रहा है। अति प्राचीन काल से ही जनजाति समुदाय भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के अभिन्न अंग रहे हैं तथा इनकी विश्वस्तरीय पहचान रही है। देश की आजादी में हमारे जनजातीय समुदाय के लोगों का अविस्मरणीय योगदान है।
 झारखण्ड वीरों की भूमि है। देश की स्वतंत्रता आन्दोलन का एक लम्बा इतिहास रहा है जिसमें यहाँ के बहुत से विभूतियों ने अपना योगदान दिया है। लोगों को इन महानायकों की गाथा व उनके योगदानों के बारे में जानना चाहिए।
 हम सभी को अपनी युवा पीढ़ी, बच्चों को अपने स्वतन्त्रता आंदोलन के महानायकों के योगदान से अवगत कराना बहुत जरूरी है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा इस दिशा में “आजादी का अमृत महोत्सव” मनाने का निर्णय लिया गया।
 वर्तमान में पूरे भारतवर्ष में उत्साह व उमंग के साथ आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। आज़ादी का अमृत महोत्सव का अर्थ है, आज़ादी के उपरांत उपलब्धियों के अमृत का आनन्द, आगामी योजनाओं के संकल्प को पूर्ण करने के जोश व जज्बे का अमृत, आज़ादी की ऊर्जा का अमृत, स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा का अमृत, नए विचारों का अमृत, नए संकल्पों एवं परिकल्पनाओं का अमृत, आत्मनिर्भरता का अमृत।
 लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता होनी चाहिए। कहा गया है कि- स्वास्थ्य ही धन है और स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। कहा जाए तो बेहतर स्वास्थ्य ही सभी व्यक्तियों के लिए सच्चे सुख का आधार है। ऐसे में, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जनजातीय बहुल इस क्षेत्र में “स्वास्थ्य मेला” का आयोजन एक अत्यंत सराहनीय प्रयास है।
 जनजातीय समाज का रहन-सहन प्रकृति के साथ होता है, लेकिन बदलते परिवेश व वातावरण एवं भोजन में मिलावटों के कारण कई स्वास्थ्य संबंधी विकार आ गये हैं। इनके निवास क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य संरचना व आधुनिक चिकित्सा संसाधनों को और बेहतर बनाने की जरूरत है।
 मुझे पूरा विश्वास है कि आज यहाँ आयोजित इस स्वास्थ्य मेला में चिकित्सकों द्वारा लोगों के स्वास्थ्य का बेहतर रूप से परीक्षण व जाँच किया जायेगा एवं उसके बाद उचित परामर्श दिया जायेगा। इस निःशुल्क सेवा से लोग अपनी बीमारियों का ससमय उपचार करा सकेंगे। मुझे बताया गया कि मरीजों को निःशुल्क औषधि भी दी जायेगी। मैंने देखा है कि स्वास्थ्य मेला के आयोजन से मन की बहुत सारी शंकाएँ भी दूर हो जाती हैं।
 इस स्वास्थ्य मेला में 350 से अधिक चिकित्सकों का भाग लेना तथा स्वास्थ्य जगत के लिए एक व्यापक पहल है। मानव स्वास्थ्य की दिशा में खूँटी आकर लोगों का स्वास्थ्य जाँच करने के लिए मैं आप लोगों को बधाई देता हूँ। मुझे आशा है कि आप सभी के आगमन से यहाँ लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागृति आयेगी।
 मुझे बताया गया कि सिकल सेल जनजातीय समुदाय में प्रचलित एक गंभीर आनुवांशिक रोग है। इस “स्वास्थ्य मेला” में इसकी भी जांच कर, इसका आकलन किये जाने की सूचना है। साथ ही, नेत्र विशेषज्ञों द्वारा आंखो की जांच की जायेगी एवं दृष्टि प्रभावित लोगों के बीच चश्मा का वितरण करना एक बहुत सराहनीय प्रयास है।
 माननीय प्रधानमंत्री जी समाज के सभी वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सुलभ कराने की दिशा में प्रतिबद्ध है। इसके लिए उन्होंने झारखंड की धरती से “आयुष्मान भारत योजना” लागू की। खुशी है कि आज यहाँ आयुष्मान कार्ड का भी वितरण किया जा रहा है।
 मुझे विश्वास है कि जनजातीय समुदाय में इस प्रकार के कार्यक्रम से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आयेगी। राज्य का हर नागरिक स्वस्थ हो, यह हम सभी का सपना है। ससमय रोगों का समुचित इलाज से अपने जीवन की रक्षा करना सबका कर्तव्य है।
 जनजातीय समुदाय के लोगों से कहना चाहूँगा कि वे हानिकारक व्यसनों के सेवन से परहेज करें एवं भगवान बिरसा के जीवन से प्रेरित होकर एक स्वस्थ्य समाज के निर्माण मे अपना सहयोग करें।
 मैं आज यह भी कहना चाहूँगा कि हमें सिर्फ इसी स्वास्थ्य मेला तक रुकना नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को इस प्रकार के स्वास्थ्य मेलाओं को गांवों तक ले जाना होगा ताकि स्वस्थ एवं विकसित झारखंड का निर्माण हो। जिला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सक्रियता से कार्य करें। मैं चाहूँगा कि राज्य के विशेषज्ञ चिकित्सकों को समय-समय पर ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर लोगों का स्वास्थ्य के प्रति मार्गदर्शन करना चाहिए।
 अन्त में, मैं यहाँ जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस “स्वास्थ्य मेला” की सफलता की कामना करता हूँ एवं इसके आयोजन हेतु श्री अर्जुन मुंडा जी, माननीय केंद्रीय मंत्री, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों, चिकित्सकों समेत उन सभी को पुनः बधाई देता हूँ, जिन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में अपना सक्रिय योगदान दिया।
जय हिन्द! जय झारखंड!
26 June 2022
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के 42वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल – सह – कुलाधिपति, झारखण्ड का संबोधन :-
 प्रदेश के किसानों के तीर्थ स्थल बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में मुझे आप सभी के बीच सम्मिलित होकर अपार खुशी है ।
 मुझे खुशी है कि राज्य में स्थापित इस कृषि विश्वविद्यालय का शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार माध्यमों से राज्य के कृषि विकास में उल्लेखनीय योगदान रहा है। विश्वविद्यालय राज्य में कृषि के विकास की दिशा में निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु प्रयासरत है।
 तीन महाविद्यालयों के साथ वर्ष 1981 में स्थापित इस विश्वविद्यालय में वर्तमान में कुल ग्यारह महाविद्यालय कार्यरत है I विगत 4-5 वर्षो में विद्यार्थियों की संख्या में चार गुणा से अधिक बढ़ोतरी हुई है।
 इस विश्वविद्यालय से वर्ष 2021-22 में कृषि, पशु चिकित्सा एवं पशुपालन तथा वानिकी विषयों में 316 विद्यार्थियों को स्नातक डिग्री मिली। करीब 64 विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों में पी०जी० एवं पी०एच०डी० की उपाधि प्राप्त की।
 विश्वविद्यालय अधीन कार्यरत तीन नये कृषि महाविद्यालयों तथा डेयरी प्रौद्योगिकी एवं मात्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पहली बार स्नातक डिग्री प्रदान की गईI मुझे जानकारी दी गई कि विश्वविद्यालय के स्नातक, पी०जी० एवं पी०एच०डी० पाठ्यक्रमों में 1450 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
 इस वर्ष उद्यान एवं कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को भी स्नातक डिग्री प्राप्त करने का अवसर मिलने वाला है। हाल के वर्षो में विश्वविद्यालय के नये एवं पुराने महाविद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपार सफलता मिलना बेहद गौरव का विषय है।
 इस विश्वविद्यालय को विगत दो वर्षो में राष्ट्रीय स्तर के कृषि विश्वविद्यालयों के आई.सी.ए.आर. रैंकिंग में क्रमश: 60वाँ एवं 58वाँ स्थान मिलाI इसके लिए कुलपति एवं समस्त विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देता हूँI उम्मीद करता हूँ कि विश्वविद्यालय के आई.सी.ए.आर. रैंकिंग में इस वर्ष सुधार देखने को मिलेगा।
 बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के शोध तकनीकों से राज्य कृषि को नई दिशा मिली है और आशा करता हूँ कि राज्य को कृषि के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में विश्वविद्यालय तत्परता से कार्य करेगा।
 झारखंड एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी गाँवों में है एवं कृषि ही उनके आजीविका का मुख्य साधन है। यहाँ के किसानों को कैसे उनकी फसल एवं उपज का उचित मूल्य मिले, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो, इस दिशा में कृषि विश्वविद्यालय को सोचना होगा और पहल करनी होगी।
 हमारे वैज्ञानिक किसानों को वर्षा जल संचयन के प्रति प्रेरित करें। हमारे किसानों को इसके प्रति जागरुक होना आवश्यक है। हमारे कृषि विश्वविद्यालय को हमेशा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु प्रयत्नशील रहना चाहिये ताकि किसानों के जीवन-स्तर में सुधार हो।
 मैं भी एक किसान परिवार से हूँ और किसानों की समस्याओं को भली-भाँति समझता हूँ, उनकी परेशानियों से अवगत हूँ। मैं चाहता हूँ कि राज्य के किसान आत्मनिर्भर बने और इसके लिए इस विश्वविद्यालय को प्रयत्नशील रहना होगा।
 हमारे वैज्ञानिकों को किसानों के बीच खेतों में जाना होगा तथा कौन-सा भू-भाग किस प्रकार की खेती एवं फसल के लिए बेहतर होगा, इसकी जानकारी किसानों को उपलब्ध करानी होगी, तभी “लैब टू लैंड” की अवधारणा पूरी तरह से सफल होगी। किसानों का विकास और उनकी खुशहाली में ही देश की खुशहाली है।
 आप लोगों को कम कृषि योग्य भूमि रहने पर उन्हें बागवानी, मछलीपालन, मुर्गीपालन आदि से जोड़ने की दिशा में भी गंभीरतापूर्वक ध्यान देने तथा सोचने की जरूरत है।
 मुझे बताया गया कि आई.सी.ए.आर. के सौजन्य से संचालित विभिन्न अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के शोध कार्यक्रमों तथा जनजातीय उपयोजना कार्यक्रमों के तकनीकी हंस्तांतरण से राज्य के किसानों को लाभ हो रहा है और उनके आय सृजन में बढ़ोतरी हो रही है। यह खुशी की बात है।
 जनजातीय बहुल इस क्षेत्र में स्थापित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में अपार क्षमता एवं संभावनाएँ है, जिसे हाल के वर्षो में विश्वविद्यालय ने साबित किया है I विगत दो वर्षो में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने राज्य के किसानों के हित में स्थानीय परिवेश के उपयुक्त विभिन्न फसलों के दर्जनों उन्नत किस्मों को विकसित किया है, जिसे स्टेट वेरायटल रिलीज़ कमिटी एवं सेंट्रल वेरायटल रिलीज़ कमिटी से अनुमोदन मिला I उम्मीद करता हूँ कि विश्वविद्यालय एवं राज्य सरकार के इस प्रयास से प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को लाभ मिलेगा I
 पहली बार विश्वविद्यालय को औषधीय दवा बिरसीन को पेटेंट मिला। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में विश्वविद्यालय द्वारा देवरी गाँव में स्थापित एलोवेरा विलेज की चर्चा की और आदिवासी महिला किसानों के कार्यों की सराहना की। विश्वविद्यालय द्वारा संग्रहित गिलोय जर्मप्लाज्म को राष्ट्रीय पहचान मिली। प्रसन्नता है कि विगत वर्ष जैविक सब्जी आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली के विकास की दिशा में सराहनीय प्रयास किया गया ।
 राज्य के बहुतायत किसानों के आजीविका का पशुपालन प्रमुख साधन रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित संकर मुर्गी नस्ल झारसिम एवं संकर सूकर नस्ल झारसुक तथा बकरी के ब्लैक बंगाल नस्ल सुधार कार्यक्रम राज्य के किसानों की आजीविका एवं पोषण सुरक्षा में उपयोगी साबित हो रही है। पशुचिकित्सा वैज्ञानिकों द्वारा चिकित्सा शिविर, टीकाकरण, क्लिनिकल काम्प्लेक्स में सभी पशुओं की जाँच एवं चिकित्सा तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रदेश के बहुतायत किसानों को लाभ मिल रहा है।
 खुशी है कि विश्वविद्यालय द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से प्रसार कार्यक्रमों एवं रणनीतिक कार्यकलापों से कृषि प्रसार कार्यक्रमों को तेजी से अमल में लाया जा रहा है। फार्मर्स फर्स्ट प्रोग्राम में विभिन्न तकनीकी हस्तक्षेप, अभिसरण एवं गृह वाटिका कार्यक्रमों ने सफलता की गाथा प्रदर्शित की है I कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा मृदा स्वस्थ्य प्रबंधन तथा पारस्परिक बीज उत्पादन कार्यक्रमों में किसानों की सहभागिता से किसान उन्नत बीज उपलब्धता का लाभ उठा रहे हैं।
 कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा जिला स्तर पर क्षमता निर्माण के तहत युवक-युवतियों को स्वरोजगार आधारित नियमित प्रशिक्षण, किसानों के खेतों में तकनीकी परीक्षण से तकनीकों को बढ़ावा, अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण से उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ावा तथा अन्य कृषि प्रसार गतिविधियों से प्रदेश के बहुतायत किसानों की कार्यक्षमता तथा कौशल विकास को काफी बल मिल रहा है I
 हमारा मानना है कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को उपयुक्त समस्यायों पर केन्द्रित अधिकाधिक अनुसंधान से किसानों के हित में लाभकारी तकनीकी विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास करनी होगी, ताकि विश्वविद्यालय के कार्यकलापों का सही लाभ राज्य की आबादी को मिल सके I
जय हिन्द! जय झारखण्ड!
25 June 2022
द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) द्वारा फाइनेंशियल मार्केट्स “प्रवाह- फ्लो टुवर्ड्स एक्सीलेंस” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में माननीय राज्यपाल का सम्बोधन:-
 द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा फाइनेंशियल मार्केट्स “प्रवाह- फ्लो टुवर्ड्स एक्सीलेंस” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में आप सभी के बीच आकर अपार खुशी हो रही है।
 मुझे यह जानकर बहुत खुशी है कि यह इंस्टीट्यूट लेखा एवं अंकेक्षण के क्षेत्र में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी संस्था है और इसका गौरवशाली इतिहास रहा है। शिक्षा, लेखा अंकेक्षण और नीतिगत मामलों में इनका अहम योगदान है।
 आज चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अपनी मेहनत और विद्वता के बल पर विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति कर रहे हैं तथा समाज एवं देश के विकास में रचनात्मक योगदान दे रहे हैं। सामाजिक कार्य में भी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का महत्वपूर्ण योगदान है।
 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष टैक्स के संग्रह एवं विभिन्न प्रावधानों को लागू करने एवं इनके अनुपालन करने में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का अहम योगदान रहता है। ऑडिट के क्षेत्र में भी इनकी सराहनीय भूमिका रही है।
 सी०ए० का काम अत्यंत चुनौतीपूर्ण के साथ-साथ सम्मानजनक भी है। इनका कार्य मनी मैनेजमेंट, ऑडिट अकाउंट का एनालिसिस, टैक्सेशन तथा वित्तीय सलाह उपलब्ध कराने का भी है।
 गर्व का विषय है कि हमारे सी०ए० देश-विदेश की विभिन्न मल्टीनेशनल व नामचीन कंपनियों में अपनी सेवा दे रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था में फाइनेंस और अकाउंट्स से जुड़े करियर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते नजर आ रहे हैं और आज हमारे युवा सी०ए० बनने के लिए काफी उत्सुक रहते हैं।
 एक समय ऐसा था, जब सी०ए० का कार्यक्षेत्र अकाउंट तक ही सीमित था, लेकिन अब इनका कार्यक्षेत्र का व्यापक विस्तार हो गया है। ज्यादातर कंपनियां कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड होती है और उन्हें सी०ए० की जरूरत पड़ती है।
 जी०एस०टी० के सफल क्रियान्वयन में भी सी०ए० की अहम भूमिका है। देश की अर्थव्यवस्था की प्रगति को अग्रसर करने एवं भारत देश को विश्व की बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में आप सबका महत्वपूर्ण योगदान है।
 15 अगस्त, 2022 को देश आजादी के 75वीं वर्षगाँठ मनायेगा। माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा आजादी के 75वीं वर्षगाँठ के 75 सप्ताह पूर्व 12 मार्च, 2021 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में इस आजादी का अमृत महोत्सव का उद्घाटन किया गया था।
 मुझे यह जानकर हर्ष हो रहा है कि भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान ने भी आजादी का अमृत महोत्सव के तहत कई कार्यक्रमों का आयोजन किया है। आज का यह राष्ट्रीय सम्मेलन इस दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।
 मुझे पूरा विश्वास है कि इस दो दिवसीय सम्मलेन में वित्तीय बाजार और पूंजी निवेश से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं पर देश के आर्थिक विशेषज्ञ चर्चा करेंगे और एक सार्थक निष्कर्ष पर पहुंचेंगे।
 अंत में, एक बार पुनः आप सभी को इस सम्मेलन के आयोजन की सफलता हेतु शुभकामनायें एवं बधाई देता हूँ एवं देश के निर्माण एवं प्रगति में आपकी सकारात्मक भूमिका की अपेक्षा करता हूँ ।
जय हिन्द! जय झारखंड!
25 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से सदस्य, नीति आयोग श्री कृष्णानंद झा ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
24 June 2022
माननीय राज्यपाल-सह-झारखंड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री रमेश बैस से राँची विश्वविद्यालय, राँची के नवनियुक्त कुलपति प्रो० अजीत कुमार सिन्हा, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय, जमशेदपुर की नवनियुक्त कुलपति डॉ० अंजली गुप्ता, डॉ० श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति डॉ० तपन कुमार शांडिल्य, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद के नवनियुक्त कुलपति डॉ० सुकदेव भोई ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
21 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने राज भवन में पतंजलि योगपीठ, राँची के सहयोग से आयोजित सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में भाग लिया एवं सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बधाई व शुभकामनायें दी। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि पूरे विश्व ने हमारे योग पद्धति को अपनाया है। हमारे लिए बहुत गर्व की बात है कि जब हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के संदर्भ में प्रस्ताव रखा तो 150 से अधिक देशों ने इसका समर्थन किया। योग से विभिन्न रोगों का निदान हो सकता है। आज विभिन्न स्थलों पर पूर्ण उत्साह के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनायें तथा अन्य लोगों को भी योग को अपनाने के लिए प्रेरित करें। राज भवन में आयोजित इस योगाभ्यास कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ० नितिन कुलकर्णी सहित राज भवन के पदाधिकारीगण/कर्मीगण एवं स्कूली बच्चे मौजूद थे। योग प्रशिक्षक के रूप में पतंजलि योगपीठ, राँची के श्री अमित कुमार मौजूद थे।
19 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने राज भवन में भेंट की। उक्त अवसर पर दोनों के मध्य लगभग एक घंटा राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपति एवं प्रतिकुलपति की नियुक्ति के संदर्भ में चर्चा हुई। माननीय राज्यपाल महोदय को माननीय मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न विकास कार्यक्रमों व विधि-व्यवस्था को प्रभावी बनाने हेतु किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
16 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से पूर्व सांसद श्री नंद कुमार साय ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
16 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से हिन्दू जागरण मंच, झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष श्री ऋषि शाहदेव के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने राज भवन में भेंट कर प्राचीन काली मन्दिर और हनुमान मंदिर की सुरक्षा हेतु पुलिस पिकेट की स्थापना के संदर्भ में एक ज्ञापन समर्पित किया। ज्ञापन में कहा गया है कि हिन्दू जागरण मंच, झारखंड गत 10 जून को हुई हिंसा की घटना की निंदा करती है। शिष्टमंडल में प्रदेश अध्यक्ष श्री ऋषि नाथ शहदेव ,प्रदेश महामंत्री वाणी कुमार राय, प्रदेश उपाध्यक्ष सुजीत सिंह, प्रदेश प्रवक्ता प्रमुख संजय कुमार वर्मा, महानगर अध्यक्ष चंदन मिश्रा मौजूद थे।
14 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से विधायक श्री बिरंची नारायण ने राज भवन में भेंट कर बोकारो इस्पात नगर अवस्थित लगभग 4 लाख आबादी के आवेदकों का विगत 2 माह से झारसेवा पोर्टल में एंट्री नहीं होने से जाति, आवासीय, आय एवं अन्य प्रमाण पत्र हेतु ऑनलाइन आवेदन दाखिल नहीं होने के संबंध में ध्यान आकृष्ट करते हुए इस समस्या के निदान हेतु पहल करने का आग्रह किया।
10 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस सपरिवार देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। माननीय राज्यपाल ने बाबा का आशीर्वाद लिया तथा देश एवं राज्य में खुशहाली की कामना की।
10 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने सपरिवार पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुरोहितों ने पूरे विधि-विधान से पूजा कराई। माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने बाबा भोलेनाथ से राज्य की शांति एवं उन्नति की प्रार्थना की।
09 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस एवं राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रामबाई बैस ने आज देवघर जाने के क्रम में पेटरवार स्थित फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में सेब एवं अंजीर का पौधा लगाया। इससे पूर्व वहाँ पहुँचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
09 June 2022
भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर कोकर, रांची स्थित धरती आबा बिरसा मुंडा की समाधि स्थल पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस और माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ।
09 June 2022
भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर राजभवन के दरबार हॉल में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देते हुए माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस और माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ।
09 June 2022
भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर बिरसा चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देते हुए माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस और माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन।
08 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से राजभवन में राज्यसभा सांसद श्रीमती महुआ माजी ने मुलाकात की। माननीय राज्यपाल से यह उनकी शिष्टाचार भेंट थी।
07 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस को श्री जगदीशप्रसाद झाबरमल टिबड़ेवाला विश्वविद्यालय, झुंझुनू द्वारा राज भवन, राँची में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह में डी. लिट की मानद उपाधि प्रदान की गई। आशा है कि यह विश्वविद्यालय अपनी उपलब्धियों से अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा और किसी की भी गरीबी उसके उच्च शिक्षा हासिल करने में बाधक नहीं होगी।– माननीय राज्यपाल


दिनांक 7 जून, 2022 को श्री जे० जे० टी० विश्वविद्यालय, झुंझुनू द्वारा राज भवन में आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर माननीय राज्यपाल का सम्बोधन:-
 श्री जगदीशप्रसाद झाबरमल टिबड़ेवाला विश्वविद्यालय, झुंझुनू द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भाग लेते हुए मुझे अपार खुशी हो रही है। आप सभी का राज भवन, झारखंड में हार्दिक स्वागत है।
 खुशी की बात है कि श्री जगदीशप्रसाद झाबरमल टिबड़ेवाला विश्वविद्यालय, झुंझुनू अपने स्थापना काल से ही विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट व लक्ष्य-उन्मुख शिक्षा प्रदान करने की दिशा में प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय विश्व में तेजी से उभरती हुई औद्योगिक जरूरतों एवं शोध संबंधी आवश्यकतों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान सुलभ कराने की दिशा में प्रयासरत है।
 शिक्षा से ही किसी भी भी देश व समाज की उन्नति संभव है, शिक्षा ही एक विकसित समाज की नींव होती है। मुझे प्रसन्नता है कि यह विश्वविद्यालय ग्रामीण एवं महिला शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिबद्ध है और आशा है कि यह विश्वविद्यालय अपनी उपलब्धियों से अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा और किसी की भी गरीबी उसके उच्च शिक्षा हासिल करने में बाधक नहीं होगी।
 यह विश्वविद्यालय अपनी कार्यशैली से देश के अन्य निजी विश्वविद्यालयों को यह भी संदेश देता है कि शिक्षण संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा सुलभ कराने के प्रति पूर्णतः समर्पित रहना है। उन्हें विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान कराने की दिशा में सचेष्ट रहने के साथ-साथ प्रोत्साहित भी करना चाहिये।
 मुझे इस विश्वविद्यालय द्वारा डी. लिट की मानद उपाधि प्रदान करना विश्वविद्यालय का मेरे प्रति स्नेह को दर्शाता है। मैं तो चाहता था कि आपके विश्वविद्यालय में जाकर और वहाँ का दौरा कर डी. लिट की उपाधि ग्रहण करूँ, इससे मुझे और भी प्रसन्नता होती। लेकिन पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों व व्यस्तताओं के कारण मैं आपके विश्वविद्यालय में नहीं आ सका। मैं आभारी हूँ कि मेरी व्यस्तताओं को समझते हुए आपने आज यहाँ आकर सम्मान समारोह का आयोजन किया। मैं आप सबका मेरे प्रति स्नेह के लिए आभारी हूँ।
 मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न क्षेत्रों की विभिन्न हस्तियों को देश की उत्कृष्ट सेवा में योगदान देने हेतु डी. लिट की उपाधि से सम्मानित किया जाता रहा है। आज विश्वविद्यालय द्वारा मुझे सम्मानित किया जा रहा है। मैं अपने-आपको सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूँ।
 मुझे यह जानकर अपार प्रसन्नता हो रही है कि इस विश्वविद्यालय ने शिक्षा और विकास के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किया है। मैं झुंझुनू के ग्रामीण क्षेत्र में इस विश्वविद्यालय को खोलने की उनकी अवधारणा की सराहना करता हूँ। इस विश्वविद्यालय द्वारा मेधावी छात्राओं के लिए शैक्षणिक शुल्क में शत-प्रतिशत और प्रत्येक छात्रा को 75% शुल्क में छूट देना बहुत ही प्रशंसनीय है। यह महिला शिक्षा व महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नेक पहल है।
 डॉ० विनोद टिबड़ेवाला जी के कुशल नेतृत्व में इस विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा इस विश्वविद्यालय को एक शोध उन्मुख विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। मुझे बताया गया कि विश्वविद्यालय में प्रभावी प्लेसमेंट सेल है और इसके माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने के प्रयास किए जाते हैं।
 अत्यंत ही हर्ष की बात है कि श्री विनोद टिबड़ेवाला जी हिन्दी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। झुंझुनू और उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए आप अस्पताल जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। यह एक सामाजिक दायित्व के साथ-साथ बहुत ही सराहनीय कार्य है।
 किसी भी विश्वविद्यालय की स्थापना व संचालन के पीछे समाज का अहम योगदान होता है। ऐसे में, किसी भी विश्वविद्यालय द्वारा यूनिवर्सिटी सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी के तहत समाजहित में इस प्रकार के पुनीत कार्य करना चाहिये। मैं राजस्थानी सेवा संघ ट्रस्ट को झुंझुनू जिले में विभिन्न सामाजिक गतिविधियों का संचालन करने के लिए बधाई देता हूँ।
 मुझे आशा है कि आपके विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थी अपनी प्रतिभा एवं संस्कार से राष्ट्र निर्माण के क्ष्रेत्र में सक्रिय योगदान देंगे। आपके विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को मेरी हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
जय हिन्द!
07 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से अभिनेता श्री सुच्चि कुमार ने राज भवन में भेंट की तथा उन्होंने राज्यपाल महोदय को बनने वाली फिल्म द लीजेंड ऑफ लॉर्ड बिरसा से अवगत कराया। विदित हो कि अभिनेता श्री सुच्चि कुमार ने उक्त फिल्म में बिरसा मुण्डा का अभिनय करेंगे।
05 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने कहा कि हम सभी पर्यावरण के लिए चिंतित हैं। पर्यावरण बचाने के लिए कई नारा देते हैं, बाते करते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से कैसे निपटें। राज्यपाल महोदय आज राज भवन में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उक्त अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी, कृषि सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी, कृषि निदेशक श्रीमती निशा उराँव, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ओ.एन. सिंह सहित कृषि विभाग एवं बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के पदाधिकारीगण मौजूद थे। माननीय राज्यपाल ने कहा कि एक समय था कि राँची अविभाजित बिहार की ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। घरों में पँखे, ए.सी. नहीं होते थे। आज देखें क्या स्थिति हो गई है? पानी का स्तर नीचे चला गया है, हमें जागरूक होने की आवश्यकता है। जब तक हम खुद जागरूक नहीं होंगे तो जनता को कैसे जागरूक करेंगे। पहले अपने-अपने घरों से शुरुआत करनी होगी। उन्होंने कहा कि झारखंड का अर्थ ही जंगल-झार होता है। यहाँ के लोग प्रकृति के उपासक होते हैं और प्रकृति की पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि एक पेड़ बनने में 40-50 साल लगता है, परन्तु 30 मिनट पेड़ काटने में लगता है। मैंने 500 फलदार पेड़ राज भवन में लगवाए हैं। राज्यपाल महोदय ने कहा कि कृषि विभाग को किसानों को कम-से-कम 5-5 फलदार पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना चाहिये। वे पेड़ लगाकर उसे बच्चों की तरह देखभाल करें। कृषि विभाग योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हुए हर नागरिक को पर्यावरण के लिए जागरूक करें। पर्यावरण दिवस एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन मनाने की आवश्यकता है। माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा आज राज भवन उद्यान में साल पौधा तथा ड्रेगन फ्रूट व काली हल्दी का औषधीय पौधा लगाया गया। विदित हो कि राज भवन उद्यान में 60 ड्रेगन फ्रूट लगाये गये हैं। माननीय राज्यपाल द्वारा बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, राँची द्वारा प्रकाशित "प्लांट्स ऑफ राज भवन, झारखंड" नामक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। इसमें राज भवन में मौजूद सभी पौधे की विशेषताओं का वर्णन किया गया है। राज्यपाल महोदय द्वारा "समेकित कृषि प्रणाली में औषधीय एवं सगंधित वनस्पतियों की कृषि तकनीक" नामक पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
04 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने स्वयंसेवी संस्था विकास भारती द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं जन-स्वास्थ्य अभियान का राज्यस्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
राज्यपाल महोदय ने विकास भारती के बरियातू स्थित परिसर में वृक्षारोपण किया तथा उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को सचेष्ट रहने हेतु कहा अपने लिए नहीं तो आने वाली पीढ़ी के लिए प्रकृति की सुरक्षा हेतु सोचे
दिनांक 4 जून, 2022 को विकास भारती द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं जन-स्वास्थ्य अभियान के राज्यस्तरीय शुभारंभ के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन :-
 स्वयंसेवी संस्था ‘विकास भारती’ द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुझे आप सभी के बीच आकर बहुत हर्ष हो रहा है। कुछ दिन पूर्व श्री अशोक भगत जी आमंत्रित करने आये थे, श्री अशोक भगत जी आमंत्रित करें, मैं न आऊँ, हो ही नहीं सकता।
 अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन जो व्यक्ति अपने देश व समाज के लिए कुछ करते हैं, उसका नाम सदा रह जाता है। विकास भारती द्वारा पर वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं जन-स्वास्थ्य अभियान समाजहित में एक नेक पहल है।
 पर्यावरण एवं जन-स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील होकर इस प्रकार के प्रयास करने के लिए स्वयंसेवी संस्था ‘विकास भारती’ को मैं बधाई देता हूँ। मैं पद्मश्री श्री अशोक भगत जी को समाजहित में ऐसे कार्य करने के लिए शुभकामनायें देता हूँ और आशा करता हूँ कि आप इसी प्रकार परोपकार के मार्ग पर चलते रहें।
 परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं और परपीड़न देने से बड़ा कोई पाप नहीं। परोपकारी मनुष्य के स्वभाव में ही दूसरों का भला करने के साथ विभिन्न समस्यायों का निदान करना होता है। परोपकार के मार्ग पर चलने से अलौकिक आनंद मिलता है। सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाके में संस्था द्वारा लोगों के कल्याण के लिए कार्य किया जाना सराहनीय है।
 झारखंड के परिप्रेक्ष्य में विकास भारती जैसे संस्था पर्यावरण की दिशा में अहम भूमिका का निर्वाह कर सकते हैं। इस संस्था में लोगों को पर्यावरण सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने की क्षमता है तथा पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए यह एक मॉडल तैयार कर सकती है।
 विकास भारती को राज्य के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इंटर्नशिप के तहत पर्यारवरण सुरक्षा व समाज सेवा के प्रति प्रेरित करने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिये। विकास भारती अधिक-से-अधिक लोगों को स्वरोजगार के साधन से जोड़ने का भी प्रयास कर सकती है।
 पर्यावरण सुरक्षा आज पूरे विश्व के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। पूरी दुनिया चिन्तित हैं, विभिन्न सम्मेलनों में इस पर गंभीर चर्चायें हो रही हैं। प्रकृति के खिलाफ संघर्ष करने की प्रवृति ने पर्यावरण का इतना नुकसान कर दिया है कि अब हमें उसके संरक्षण की जरूरत पड़ रही है।
 आज धरती के चारों तरफ सुरक्षात्मक ओजोन परत दिन-प्रतिदिन पतली होती जा रही है, जिससे धरती पर रहनेवाले सभी जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर एक प्रश्नचिन्ह लग गया है।
 पर्यावरण असंतुलन के कारण ही अनावृष्टि, अल्पवृष्टि एवं सुखाड़ से लोग प्रभावित हो रहे हैं। भूगर्भ जल नीचे जा रहा है। वृक्षों एवं पहाड़ों की अन्धाधुन्ध कटाई से प्रकृति विनाश की ओर जा रही है। फसल चक्र भी प्रभावित हो रहा है। नदियों का पानी दूषित हो गया है। ऐसे में हमें सामाजिक दायित्व को समझना होगा। पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखकर कार्य करने की जरूरत है। साथ ही वर्षा जल संचयन की दिशा में भी ध्यान देने की जरूरत है ताकि वाटर लेवल सही रहे।
 कभी राँची को झारखंड बनने से पूर्व बिहार राज्य का ग्रीष्मकालीन राजधानी कहा जाता था। यह गर्मी के माह में भी सुहावना मौसम के लिए जाना जाता था। लेकिन आज देखिये, इसकी हालत क्या है? अप्रैल-मई माह में भीषण गर्मी का लोगों को सामना करना पड़ रहा है, लू से लोग बीमार हो रहे हैं, स्कूलों के समय में परिवर्तन करना पड़ रहा है। ऐसे में हम सभी यह सोचने के लिए विवश हैं कि यदि हम पर्यावरण सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति सचेष्ट व गंभीर नहीं होंगे, तो आने वाले दिन और भी कष्टदायक हो सकते हैं।
 प्राकृतिक संसाधनों का अन्धाधुन्ध उपभोग और पर्यावरण के प्रति उदासीनता ने पूरे विश्व को क्षति पहुँचायी है। पृथ्वी तेजी के साथ अपने निधि को खोते जा रही है। भूमि जिस पर हम फसल उगाते हैं, जल जिसे हम पीते हैं और हवा जिसे हम श्वास के रूप में लेते हैं, सभी प्रदूषित हो रहे हैं। पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण वैश्विक चिंता का विषय बन गया है।
 यदि हम प्रकृति की सुरक्षा हेतु नहीं चेते एवं प्रकृति की सुरक्षा हेतु तेजी से आगे नहीं बढ़े तो पृथ्वी के सभी जीव विनाश की ओर तेजी से आगे बढ़ेंगे। ग्लोबल वार्मिंग से फसल चक्र भी अनियमित हो जायेगा। इससे फसल पैदावार भी प्रभावित होगी।
 हमारा राज्य प्राकृतिक सौंदर्य से सुशोभित है। वन, पहाड़, झरने जैसी चीजें हमारी जिंदगी में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। हमें अपनी इस निराली, मनमोहक प्रकृति को बचाकर रखना है। राज्य के सभी नागरिकों से अपेक्षा है कि वे अपने जीवन में अधिक-से-अधिक पौधे लगाएँ तथा पर्यावरण संरक्षण में अमूल्य योगदान दें ताकि आगे आनेवाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो सके।
 झारखंड राज्य में प्रकृति ने खूबसूरती के साथ प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा प्रदान की है, यदि इसका सुनियोजित व योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाय तो दुनिया की कोई ताकत हमारे राज्य की तेज गति से समृद्धि की राह पर जाने से रोक नहीं सकती, सिर्फ पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए इसके लिए भी कार्य करने की जरूरत है।
 मेरे कहने का मतलब यह नहीं कि पर्यावरण संतुलन के लिए राज्य में उद्योग-धंधे, कल-कारखाने नहीं स्थापित हो। औद्योगिक विकास हो, लेकिन संतुलन जरूरी है। औद्योगिकीकरण और पर्यावरण में संतुलन होना चाहिये। औद्योगिकीकरण पर्यावरण की कीमत पर नहीं किया जाना चाहिये।
 विकास के साथ-साथ पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखना प्रत्येक मानव का दायित्व व धर्म है। शहरी क्षेत्रों का विस्तार सुनियोजित योजना के तहत किया जाय।
 मुझे पूरा विश्वास है कि पद्मश्री श्री अशोक भगत जी के मार्गदर्शन में यह संस्था पर्यावरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस राज्य का नाम रौशन करेगी तथा पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति सबको जागरूक करने में सफल होगी एवं अन्य संस्थाओं के लिए भी प्रेरणा का कार्य करेगी।
जय हिन्द! जय झारखंड!
04 June 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से विधानसभा सदस्य श्री राज सिन्हा ने राज भवन में भेंट कर विधि महाविद्यालय, धनबाद, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद में बरती जा रही अनियमितताओं के संदर्भ में ध्यान आकृष्ट कराया तथा समस्याओं के निदान हेतु पहल करने का आग्रह किया।