Press Releases:-2021
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27 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से भारतीय जनता पार्टी, झारखण्ड प्रदेश का एक शिष्टमंडल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं राज्य सभा सांसद श्री दीपक प्रकाश के नेतृत्व में राज भवन में भेंट कर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजधनवार के विधायक श्री बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाने हेतु पहल करने संबंधी एक ज्ञापन समर्पित किया। इस ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि झारखण्ड सरकार के गठन के 26 महीने बीत चुके परन्तु आज भी सदन की कार्यवाही बिना नेता प्रतिपक्ष के चलाई जा रही है। विदित हो कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजधनवार के विधायक श्री बाबूलाल मरांडी को पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया है। लेकिन माननीय विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अब तक श्री मरांडी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष के अभाव में राज्य के महत्वपूर्ण विधायी कार्य एवं संवैधानिक नियुक्तियां प्रभावित हो रही है। उक्त अवसर पर भाजपा के कई लोक सभा एवं राज्य सभा के सांसदगण तथा विधायकगण मौजूद थे।
26 February 2022
भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान द्वारा आयोजित किसान मेला-सह-कृषि प्रदर्शनी के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय के सम्बोधन के मुख्य बिन्दु:-
Ø भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान (आई०आई०एन०आर०जी०) द्वारा आयोजित इस किसान मेला-सह-कृषि प्रदर्शनी कार्यक्रम में आप सभी के बीच सम्मिलित होकर अपार खुशी हो रही है।
Ø राज्य के किसानों को बेहतर कृषि कार्य के प्रति प्रेरित करने की दिशा में आपके संस्थान द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन एक सराहनीय प्रयास है। हमारे किसान भाई-बहनों को उन्नत कृषि कार्य हेतु विभिन्न तकनीकों की जानकारी प्रदान करना आपका दायित्व है।
Ø झारखंड राज्य एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती हैं और कृषि ही उनके आजीविका का मुख्य साधन है। हमारे खुशहाल व अन्नदाता किसान ही खुशहाल झारखण्ड का निर्माण कर सकते हैं।
Ø कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसलिए कृषि का विकास एवं किसानों की समृद्धि की दृष्टि से जरूरी है कि किसानों को अपनी मेहनत का प्रतिफल मिले और इसके लिए उन्हें नवीन तकनीक की जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
Ø भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान कृषि अनुसंधान में लगे देश के पुराने संस्थानों में से एक है। प्राकृतिक राल एवं गोंद बहुत लाभदायक उत्पाद है। इस संस्थान को प्राकृतिक राल एवं गोंद के उत्पादन को प्रोत्साहित करने तथा प्रोसेसिंग द्वारा इनके उपयोग में बढ़ोतरी हेतु निरंतर प्रयास करते रहना चाहिये।
Ø लाख एक बहुपयोगी प्राकृतिक उत्पाद है तथा भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है। हमारे देश में हर वर्ष लगभग 20 हजार टन लाख का उत्पादन होता है एवं इसका करीबन 65% हिस्सा दुनिया के विभिन्न देशों को निर्यात किया जाता है।
Ø खुशी की बात है कि झारखण्ड देश का सबसे बड़ा लाख उत्पादन करने वाला राज्य है। विश्व स्तर पर लाख की माँग में निरंतर वृद्धि हो रही है और यह आगे भी जारी रहेगी।
Ø राज्य में कुसुम, बेर एवं पलास बहुतायत में उपलब्ध हैं, लेकिन इनका उपयोग लाख की खेती के लिए पूर्ण रूप से नहीं हो रहा है। लाख एक ऐसा प्राकृतिक उत्पाद है, जिसका बिजली उद्योग, कपड़ा उद्योग, चमड़ा उद्योग, पेंट व पॉलिस उद्योग में बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। साथ ही हस्तशिल्प के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता काफी अधिक है।
Ø मेरा सुझाव है कि हमारे किसानों को इन अनुकूल परिस्थितियों का लाभ उठाना चाहिए। हमारे अन्नदाता किसान भाई-बहन कृषि, बागवानी, सब्जी-उत्पादन, फूल उत्पादन, पशुपालन आदि के साथ लाख की खेती को एक अच्छे विकल्प के रूप में कर सकते हैं।
Ø इस संस्थान के वैज्ञानिकों ने लाख उत्पादन, प्रोसेसिंग, उत्पाद विकास एवं मूल्यवर्द्धन से संबंधित अन्य कई नई तकनीकें विकसित की है। लाख प्रोसेसिंग की एक छोटी इकाई भी संस्थान ने विकसित की है, जिसे ग्रामीण स्तर पर लगाकर किसान भाई-बहन अपने उत्पाद को साफ करके कई महीनों तक रख सकते हैं।
Ø संस्थान द्वारा लाख से अनेक प्रकार के मूल्यवान पदार्थों को बनाने हेतु कई पायलट प्लांट का प्रदर्शन किया गया है, जो कि लाख आधारित उद्यमियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
Ø मैं भी एक किसान परिवार से आता हूँ और मैंने भी खेती की है। इसलिए मैं किसानों की समस्याओं को काफ़ी करीब से जानता हूँ। हमारे किसानों को यह बताना होगा कि किस प्रकार की मिट्टी में कौन-सी फसल अच्छी होगी। किसानों के खेतों की मिट्टी की जाँच होना भी बहुत जरूरी है।
Ø हमारे किसानों को यह भी बताना चाहिये कि कम खेत रहने पर किस प्रकार की खेती करनी चाहिये। किस प्रकार वे सब्जियाँ लगाकर, केले की और गेंदा के फूल की खेती कर लाभ उठा सकते हैं।
Ø लाख आधारित समेकित कृषि प्रणाली अपनाने से एक फसल में निर्भरता के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश के अभाव में अक्सर फसल की बर्बादी के कारण हमारे किसानों को काफ़ी नुकसान होता है।
Ø मुझे जानकर खुशी हो रही है कि संस्थान में नियमित तौर पर लाख की वैज्ञानिक खेती, प्रोसेसिंग एवं उपयोग से संबंधित प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, जिसमें विभिन्न राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र आदि के किसान व उद्यमी भी नई तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और इसे अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं।
Ø लाख के साथ-साथ संस्थान में अन्य प्राकृतिक राल एवं गोंद के प्रोसेसिंग तथा उपयोग पर अनुसंधान हो रहा है। दुनिया में स्वास्थ्य संबंधी बढ़ती समस्याओं के बीच प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग एक बेहतर विकल्प है।
Ø इस किसान मेला में आये आप सभी किसान भाई-बहनों से कहना चाहूँगा कि संस्थान में उपलब्ध उन्नत तकनीक का लाभ उठाएं एवं लाख की खेती में अपने प्रदेश को और आगे बढ़ाएँ।
Ø संस्थान के वैज्ञानिकों से यह अपेक्षा है कि कृषकों एवं उद्यमियों की समस्याओं के निपटारा के लिए सदैव सक्रिय रहें। साथ ही साथ लाख कृषक अपने उत्पाद को सही समय एवं सही दर पर बेच सकें, यह सदा ध्यान रहें।
जय हिन्द!
25 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 176(1) के अंतर्गत पंचम झारखंड विधान सभा के अष्टम (बजट) सत्र, 2022 को संबोधित किया।
25 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से विधान सभा सदस्य श्री लम्बोदर महतो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज भवन में भेंट कर राज्य में महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश की भांति पंचायत चुनाव में पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने हेतु चुनाव पूर्व ट्रिपल टेस्टिंग कराने के लिए कमिटी के गठन व सर्वोच्च न्यायालय में वाद संख्या SLA (C) No.- 19756/2021 राहुल रमेश वाद्य बनाम महाराष्ट्र राज्य का कड़ाई से अनुपालन कराने हेतु पहल करने का आग्रह संबंधी ज्ञापन समर्पित किया।
22 February 2022
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा, राँची द्वारा आयोजित विज्ञान प्रौद्योगिकी महोत्सव ‘विज्ञान सर्वत्र पूज्यन्ते’ के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन:-
 सर्वप्रथम, आप सभी को विज्ञान प्रौद्योगिकी महोत्सव ‘विज्ञान सर्वत्र पूज्यन्ते’ के आयोजन के लिए हार्दिक बधाई व शुभकामनायें।
 मानव जीवन में क्रांति लाने का श्रेय विज्ञान को है। आज हर जगह, हर पल विज्ञान का प्रभाव सर्वत्र देखा जा सकता है। विज्ञान ने हर पग पर मानव जीवन को इतनी सुविधाएँ प्रदान की हैं, वह मनुष्य के लिए कामधेनु बन गया है।
 विज्ञान ने धरती, आकाश और जल, तीनों को प्रभावित किया है। धरती का तो शायद ही कोई कोई कोना हो, जहाँ विज्ञान ने कदम न रखा हो। विज्ञान के कारण आज मनुष्य की उन्नति और प्रगति का कोई सीमा नहीं है।
 सर्वप्रथम कृषि क्षेत्र में आई क्रांति का मुख्य कारण विज्ञान ही है। विज्ञान की वजह से ट्रैक्टर, ट्यूबवेल, कीटनाशक, खरपतवार नाशक यंत्र और दवाएँ हैं । इसके अलावा उन्नत बीज, खाद और यंत्रों का आविष्कार विज्ञान के कारण ही संभव हो पाया है।
 आज मैं आप सभी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर संबोधित कर रहा हूँ। ये साइंस एवं टेक्नोलॉजी की ही तो देन है।
 हरकारों और कबूतरों से संदेश भेजने वाला मनुष्य चिट्टियों और पोस्ट कार्ड की दुनिया से निकलकर टेलीफ़ोन, ई-मेल से होते हुए मोबाइल तक आ पहुँचा है।
 चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में विज्ञान ने मनुष्य को नया जीवन दिया है। अब रोगों का इलाज ही नहीं, शरीर के अंगों को बदला भी जा रहा है। रक्तदान और नेत्रदान जैसे मानव हित के कार्यों और विज्ञान के सहयोग से मनुष्य को नवजीवन मिल रहा है।
 हमारे वैज्ञानिक चाँद पर जा रहे हैं, मंगल पर जीवन की तलाश कर रहे हैं। हमारे वैज्ञानिक निरंतर उपग्रह छोड़ने में सफलता प्राप्त कर रहे हैं। हमारा देश परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है।
 पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल जी ने विज्ञान की इसी अहमियत को देखते हुए ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ का नारा दिया।
 मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि झारखंड साइंस एवं टेक्नोलॉजी क्षेत्र में निरंतर प्रगति की दिशा में प्रयासरत है।
 राज्य में अकूत कोयला भंडार की मौजूदगी इसे कई औद्योगिक गतिविधियों के लिए एक आदर्श प्रदेश बनाती है। बोकारो, जमशेदपुर और कई अन्य स्थानों में बड़ी संख्या में थर्मल और स्टील पावर प्लांट स्थापित किए गए हैं।
 बी०आई०टी०, मेसरा, बी०आई०टी०, सिंदरी, निफ़्ट और आई०एस०एम०, धनबाद जैसे तकनीकी संस्थानों ने इनोवेशन और इमेजिनेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
 मुझे यह कहते हुए गौरव हो रहा है कि झारखंड राज्य ने कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व, वैज्ञानिक और शोधकर्ता दिए हैं, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने के लिए प्रेरित किया है।
 जैसा कि हम जानते हैं कि "आजादी का अमृत महोत्सव" राष्ट्रव्यापी उत्सव विभिन्न विषयों के तहत चल रहा है। इस कार्यक्रम में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी संगठनों द्वारा "विज्ञान सर्वत्रे पूज्यते" के गौरवशाली विषय के तहत "विज्ञान सप्ताह" का आयोजन किया गया है, जिसका उद्देश्य तकनीकी कौशल को प्रदर्शित करना है, जिन्होंने विभिन्न समस्याओं के समाधान खोजने में मदद की है।
 हमारा लक्ष्य युवा मस्तिष्क को प्रेरित करना और एक प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाना है। हम भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दुनिया से 75 प्रमुख योगदानों को भी प्रदर्शित कर रहे हैं जो आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रणाली में मील का पत्थर साबित हुए हैं। इसके अलावा हम पारंपरिक ज्ञान प्रणाली के कोश को चिन्हित कर अपना रहे हैं, जिसने ‘स्वदेशी पारंपरिक आविष्कारों और इनोवेशन’ की अवधारणा के तहत भारत को पुनर्स्थापित किया है।
 आधुनिक भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिशन के पथ पर अग्रसर है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोना महामारी ने हमारे सामने अभूतपूर्व चुनौतियाँ रखी और हमारे वैज्ञानिकों ने प्रभावशाली एवं सुरक्षित ढंग से वैक्सीन का आविष्कार कर इन चुनौतियों का सामना किया।
 अन्त में, एक बार पुनः मैं बी०आई०टी० मेसरा के छात्रों, संकाय सदस्यों और अन्य सभी सम्बद्ध सदस्यों को इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई व शुभकामनाएं देता हूँ।
जय हिंद!
जय जवान! जय किसान!! जय विज्ञान!!!
22 February 2022
माननीय राज्यपाल-सह-झारखण्ड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री रमेश बैस ने विश्वविद्यालय में पदाधिकारियों के रिक्त पदों पर आविलम्ब नियुक्ति का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय में कुलसचिव, उप कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त पदाधिकारी जैसे पदों का रिक्त रहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में स्थाई व्यवस्था होना चाहिये ताकि वे अपने कार्य के प्रति पूर्णतः जिम्मेदार हों। राज्यपाल महोदय आज राज भवन में राज्य के विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी, झारखण्ड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री अमिताभ चौधरी, प्रधान सचिव, वित्त श्री अजय कुमार सिंह, प्रधान सचिव, कार्मिक, श्रीमती वंदना डाडेल, सचिव, भवन निर्माण विभाग श्री सुनील कुमार सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति मौजूद थे।
राज्यपाल महोदय ने कहा कि समस्याएं आज भी हैं। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, कार्मिक विभाग, झारखण्ड लोक सेवा आयोग को अपने कार्यों में और तेजी लानी होगी। झारखंड लोक सेवा आयोग को नियुक्ति प्रक्रिया में गति लाने की आवश्यकता है। छात्रहित में वित्तीय संसाधन (फंडिंग) भी होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि वे इन तीन महीने में विश्वविद्यालयों में हुई कार्य-प्रगति से संतुष्ट नहीं है। सिर्फ आश्वासन से कम नहीं चलेगा, सबको छात्रहित में हर हाल में प्रतिबद्धता से कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि आज जो भी बातें हुई, मुद्दे उठे, समस्याएँ बताई गई और आप लोगों ने सुनी, उन पर गंभीरता से कार्य करें, सिर्फ आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि मुझे परिणाम चाहिये, यह बात मैं पूरी गंभीरता से कह रहा हूँ।
राज्यपाल महोदय ने चांसलर पॉर्टल की समीक्षा करते हुए कहा कि महाविद्यालय इसमें सहयोग कर इसे प्रभावी बनायें। उन्होंने अगले सत्र के लिये शैक्षणिक सत्र का निर्माण शीघ्र ही कर लें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में समय पर परीक्षा का संचालन हों एवं परीक्षा परिणाम जारी हो ताकि शैक्षणिक सत्र किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा में सम्मिलित होने में बाधा न बने। माननीय राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों द्वारा समय पर दीक्षांत समारोह नहीं किया जाता है, तो विश्वविद्यालय उपाधि उनके घर प्रेषित करें। दीक्षांत समारोह में विलंब के कारण विद्यार्थियों को परेशानी नहीं होनी चाहिये। उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों में डिजिटाइजेशन पर चर्चा करते हुए कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों को वाई-फाई युक्त करें।
राज्यपाल महोदय ने विश्वविद्यालय में शोध के स्तर के उच्च करें। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में वित्तीय अंकेक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया जाना चाहिये। उन्होंने राज्य में ओपेन यूनिवर्सिटी के अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने राज्य के विश्वविद्यालयों को सामाजिक कार्य करने हेतु भी कहा। उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर आयोजित किये जा रहे सभी कार्यक्रमों की जानकारी राज भवन को प्रेषित करने हेतु निदेश दिया। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से नई शिक्षा नीति के संदर्भ में भी चर्चा करते हुए कहा कि इस संदर्भ में कार्यशाला, सेमिनार का आयोजन करें। उन्होंने झारखंड हायर एजूकेशन काउंसिल के कार्यों के संदर्भ में पृच्छा की।
माननीय राज्यपाल ने निर्माणाधीन भवनों के निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी लेते हुए भवन निर्माण सचिव को निदेश दिया कि निर्माणाधीन भवनों के निर्माण कार्य में तीव्रता लाई जाय एवं विश्वविद्यालय को शीघ्र हस्तांतरित करें। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों में चाहरदीवारी कराने हेतु निदेश दिया।
बैठक में कहा गया कि विश्वविद्यालयों में रिक्त प्रशासनिक पदों पर शीघ्र ही नियुक्ति कर ली जायेगी। साथ ही अवगत कराया कि विश्वविद्यालयों में 1000 से अधिक पद स्वीकृत किया गया है। रोस्टर क्लिरेंस की दिशा में अवगत कराते हुए कहा गया कि रोस्टर क्लियरेंस में यूनिवर्सिटी को यूनिट माना जायेगा।
18 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने माननीय राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद से राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में भेंट की।
16 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कांशसनेस का एक प्रतिनिधिमंडल ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
16 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से लोक सभा सांसद श्री संजय सेठ ने राज भवन में भेंट की। उक्त अवसर पर उन्होंने एचईसी के संदर्भ में चर्चा करते हुए राज्यपाल महोदय द्वारा किये गये पहल हेतु आभार व्यक्त किया तथा अपने संसदीय क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त करने हेतु किये जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
15 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने उपायुक्त, राँची श्री छवि रंजन से आज राज भवन में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, राँची की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की तथा इसे प्रभावी बनाने हेतु निदेश दिया।
14 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से यू.एस.काउंसेल जनरल इन कोलकाता श्रीमती मेलिंडा एम.पावेक ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की। राज्यपाल महोदय ने श्रीमती मेलिंडा एम.पावेक से झारखंड राज्य की समृद्ध प्राकृतिक सौंदर्यता, कला-संस्कृति आदि विभिन्न विषयों पर चर्चा की। उक्त अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी भी उपस्थित थे।
14 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एक परिवार की तरह होते हैं, जिसमें सबको मिल कर कार्य करना होता है। झारखण्ड राज्य की प्रगति एच.ई.सी. वरदान हो सकते हैं। राज्यपाल महोदय ने आज एच.ई.सी का भ्रमण किया एवं वहाँ एच.ई.सी के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में एच.ई.सी के सी.एम.डी श्री नलिन सिंघल, सीएमडी, डॉ राणा एस. चक्रवर्त्ती, निदेशक (विपणन सह उत्पादन), श्री एम.के. सक्सेना निदेशक (कार्मिक), श्रीमती ए.पांडा, निदेशक (वित्त) एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। राज्यपाल महोदय ने कहा कि पी.एस.यू अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के घाटे के कई प्रमुख कारण मिस मैनेजमेंट है, विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का ससमय निदान नहीं कर पाना है। उन्होंने कहा कि एच.ई.सी. को कभी राष्ट्र का गौरव माना कहा जाता था, इसका अस्तित्व बचा रहे, इसके लिए मैं प्रयास करूंगा।
झारखण्ड में खनिज और प्राकृतिक सौंदर्यता है। विकास की दिशा में आगे बढ़ने हेतु जन सहयोग का अपेक्षित सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोई परिवार में यदि माता बूढ़ी हो जाती है तो हम सभी उनकी सेवा करते हैं। अधिकारी एवं कर्मचारी मिलकर 6 दशक पुरानी इस संस्थान की सेवा कर इसे बचायेंगे, ऐसी आशा है। राज्यपाल से विभिन्न श्रमिक संगठनों एवं अधिकारियों के संगठनों ने मिलकर एच.ई.सी के पुर्णोद्धार के लिये अपने स्तर पर कोशिश करने का आग्रह किया। राज्यपाल ने कहा कि इंडस्ट्री में कई यूनियन होते हैं। मैं देख रहा हूं कि यहां सारे यूनियन का एक ही सोच है कि एच.ई.सी कैसे बचे। मैंने पहले सिर्फ इस संस्थान के बारे सुना था आज इसे देखा भी।
इससे पूर्व एच.ई.सी के सबंध में अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि यहां की मशीनें 60 वर्ष पुरानी हो चुकी है। प्रतिस्पर्धा के इस युग से बचे रहने के लिये मशीनों का आधुनिकीकरण होना नितांत आवश्यक है। अभी एच.ई.सी के पास 1700 करोड़ का कार्यादेश है। एच.ई.सी ने बोकारो स्टील प्लांट, भिलाई और दुर्गापूर स्थित प्लांट की स्थापना में अपना महत्वूपर्ण योगदान दिया है। इसरो का मोबाईल लॉचिंग पैड भी एच.ई.सी के द्वारा निर्मित किया गया है। अधिकारियों द्वारा कहा गया कि एच.ई.सी के पास अभी उपलब्ध 1000 एकड़ भूमि मे से 300 एकड़ बेचने की अनुमति दे ताकि उस राशि से एच.ई.सी का आधुनिकीकरण किया जा सके। बैंकों द्वारा बैंक गारंटी वापस ले लिया गया जिसके कारण परेशानी है। एच.ई.सी को 7,199 एकड़ जमीन दिया गया था जिसमें 2578 एकड़ प्रयोग किया गया है, लगभग 73 एकड़ जमीन में अतिक्रमण है। आज भी लगभग 10,000 परिवार प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से एच.ई.सी से जुड़े हैं। इतने बड़े संस्थान में स्थाई सी.एम.डी. नहीं होने के कारण निर्णय लेने में विलम्ब होता है। राज्यपाल द्वारा एफएफपी प्लांट में एलपीजी से चलने वाली फर्नेंस का उद्घाटन भी किया गया एवं प्रशासनिक भवन परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया।
13 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने 133 बटालियन, सीआरपीएफ, धुर्वा, रांची मुख्यालय में वीर शहीद एस.बी. तिर्की के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
10 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री अमिताभ चौधरी ने राज भवन में भेंट की। उक्त अवसर पर राज्यपाल महोदय को उन्होंने आयोग की अद्यतन गतिविधियों से अवगत कराते हुए आयोग द्वारा विश्वविद्यालय में रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति व शिक्षकों की प्रोन्नति की दिशा में किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
09 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस सपरिवार रजरप्पा, रामगढ़ गये एवं वहाँ माँ छिन्नमस्तिका की पूजा-अर्चना की। उन्होंने पूजा के उपरांत पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि जबसे झारखण्ड आने के साथ ही यहाँ आने की इच्छा थी, लेकिन संयोग नहीं बन पा रहा था और कतिपय कारणों से नहीं आ पाया। आज माँ का बुलावा आया और आ गया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में देवी व माता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

राज्यपाल महोदय ने कहा कि उनकी इच्छा रहती है कि हर शक्ति/सिद्ध पीठ जाएं। पूजा से आत्मिक शान्ति एवं शक्ति प्राप्त होती है। राज्यपाल महोदय ने कहा कि माँ छिन्नमस्तिका से उन्होंने पूरे प्रदेश के विकास व जनता की सुख-समृद्धि की कामना है और उन्हें विश्वास है कि माँ सबका कल्याण करेगी।

इससे पूर्व माननीय राज्यपाल महोदय का रजरप्पा पहुंचने पर जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया तथा जवानों द्वारा 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया।
08 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस सपरिवार जोन्हा, राँची गये एवं वहाँ गौतम धारा जलप्रपात का अवलोकन किया। उन्होंने उक्त स्थल की प्रकृति की खूबसूरती को निहारते हुए कहा कि झारखण्ड राज्य को प्रकृति ने अत्यन्त ही खूबसूरती प्रदान की है। यहाँ के झील, झरने, जलप्रपात, नदी, पहाड़, घने जंगल बहुत ही मनमोहक हैं और ये लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने असीम क्षमता रखते हैं। राज्य के विभिन्न पर्यटन स्थलों में विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनने की अपार संभावनाएं हैं।
राज्यपाल महोदय ने उपस्थित अधिकारियों से स्थानीय व्यक्तियों के रोजगार/स्वरोजगार के संदर्भ में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने स्थानीय लोगों हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी जानकारी ली।
07 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा का एक प्रतिनिधिमंडल ने राज भवन में भेंट कर विभिन्न मांगों से संबंधित एक ज्ञापन समर्पित किया। शिष्टमंडल में श्री हेमन्त कुमार गुप्ता एवं अन्य मौजूद थे।
07 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से ब्रिगेडियर (से.) श्री मनीष त्रिपाठी ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
07 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान के निदेशक श्री के.के. शर्मा ने राज भवन में भेंट कर संस्थान की गतिविधियों व उपलब्धियों से अवगत कराया।
06 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन पर गहरा दुःख व शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि लता जी ने अपने गायन से पूरे विश्व में अमिट पहचान स्थापित की। भारतीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को सदा स्मरण किया जायेगा। प्रखर देशभक्त व प्रेरणादायी व्यक्तित्व लता जी का जाना पूरे देशवासियों एवं कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। राज्यपाल महोदय ने कहा कि पूरी दुनिया के संगीतप्रेमी आज उदास हैं। उनकी सुरीली आवाज हमेशा हमारे बीच गूंजती रहेगी। उन्होंने इस महान पुण्यात्मा के प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ईश्वर शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
04 February 2022
राँची विश्वविद्यालय, राँची के 35वें दीक्षांत समारोह के अवसर माननीय राज्यपाल-सह-झारखंड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति का सम्बोधन
 राँची विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यन्त हर्ष का अनुभव हो रहा है। उपाधि ग्रहण करने वाले सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य हेतु मेरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। मैं शिक्षकों एवं अभिभावकों को भी बधाई देता हूँ।
 आज का दिवस सभी उपाधिधारकों के लिए एक अविस्मरणीय पल तो है ही, साथ ही अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक, उत्साहवर्धक और नवीन आशाओं का संदेशवाहक है।
 दीक्षांत समारोह का अपना एक विशेष महत्व है। विद्यार्थियों के चेहरे पर मुस्कान, उमंग एवं उत्साह इस समारोह की गरिमा को और बढ़ा देता है।
 यह क्षण विद्यार्थियों के लिए अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करने के साथ आगामी जीवन सफर तय करने की दिशा में एक नया कदम भरने का रोमांच एवं नए दायित्वों को भी निभाने हेतु प्रेरित करता है।
 अभी तक आप अपने माता-पिता, गुरुजनों के परामर्श से चलते रहे, परन्तु अब आगे आपको जीवन में अपना मार्ग स्वंय ढूंढ़ना है और बनाना है। विश्वविद्यालय ने विविध पाठ्यक्रमों, योजनाओं, नीतियों तथा अनेक उपयोगी गतिविधियों के माध्यम से आपको संस्कारित किया है। अब आपको अपने जीवन की नयी और चुनौतीपूर्ण पारी खेलनी है।
 मैं जानता हूँ कि उपाधिधारक विद्यार्थियों के सामने उनका भविष्य खड़ा है। लेकिन यह भी सच है कि सिर्फ उपाधि प्राप्त करने से ही शिक्षा का समापन नहीं होता, अपितु एक नयी यात्रा का भी आरंभ होता है।
 मेरे प्यारे विद्यार्थियो, ज़िन्दगी व्यक्तिगत उत्कर्ष-अपकर्ष की गाथा नहीं है, जिन्दगी व्यक्तिगत लाभ-हानि का लेखा-जोखा भी नहीं है, ज़िन्दगी समाज में सांस लेती है, समाज से ही ऊर्जा प्राप्त करती है और समाज को अपनी ऊर्जा से ही सजाती है। यही जीवन-यात्रा का उद्देश्य भी है।
 हमारे शिक्षा दर्शन के बारे में बताया गया कि शिक्षा का मूल उद्देश्य है- चरित्र निर्माण, शिक्षा का कार्य खाली दिमाग को खुले दिमाग में बदलना है, इसके लिए जरूरी है कि शिक्षक अपने हृदय में सहानुभूति और समर्पण को जगह दे, ताकि शिक्षक छात्रों को समझ सके, उनकी समस्याओं को जान सके, पहचान सके और उसके निदान का मार्ग प्रशस्त कर सकें।
 विद्यार्थियों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखना, उन्हें स्वर्ण पदक देना, डिग्रियां बाँटना ही हमारा कर्म-धर्म नहीं, अपितु उनमें चेतना को और भी जागृत कर उनमें बेहतर-से-बेहतर करने की भूख जगाना, उनकी सर्वोत्तम प्रतिभा के लिए ज़मीन तैयार करना, उनमें आत्मनिर्भता एवं आत्मविश्वास का जोश जगाना, एक बेहतर और सम्पूर्ण इन्सान बनाना ही शिक्षा का परम लक्ष्य है और होना भी चाहिये।
 समरसता की संस्कृति का भूखण्ड है-झारखण्ड। यही समरसता यहाँ के लोगों की जीवन शैली में देखी जा सकती है।
 झारखण्ड वह प्रदेश है जहाँ भगवान बिरसा ने संगठन और सामूहिकता का जीवन दर्शन पूरी दुनिया को दिया। मुझे विश्वास है कि यहाँ के युवा झारखण्ड के इस संस्कार और यहाँ की संस्कृति को और आगे ले जायेंगे।
 मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि सन् 1960 में स्थापित राँची विश्वविद्यालय राज्य का सर्वाधिक पुराना विश्वविद्यालय है और इसने अपनी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कारण राष्ट्रीय पटल पर एक विशिष्ट पहचान बनाई है। खुशी है कि यहाँ के विद्यार्थियों ने अपने ज्ञान के बल पर पूरे विश्व में अपना परचम लहराया है।
 मैं चाहूँगा कि इस विश्वविद्यालय की गणना देश के उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों के रूप में हो। विश्वविद्यालय को इस दिशा में सोचना होगा और परिश्रम भी करना होगा। मुझसे जो भी सहायता या योगदान की आवश्यकता होगा, मैं उसके लिए सदा ही तत्पर हूँ और रहूँगा।
 मैं चाहूँगा कि विश्वविद्यालय में ज्ञान का ऐसा सुन्दर वातवरण स्थापित हो कि अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी यहाँ पढ़ने हेतु मंशा रखें। देश के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सर्वेक्षण तालिका में हमारे यहाँ के विश्वविद्यालय अग्रिम स्थान प्राप्त करें।
 झारखंड राज्य के शिक्षण संस्थानों में बेहतर आधारभूत संरचनायें हों। साथ ही, वहाँ उच्च कोटि के विकसित पुस्तकालय होने के साथ प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरण उपलब्ध हों तथा उच्च कोटि के शोध कार्य हों।
 हमारे यहाँ के विद्यार्थी प्रतिभावान हैं, विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में अच्छा कर राज्य का मान बढ़ा रहे हैं। यह क्षेत्र “एजूकेशन हब” तो है ही, मैं चाहता हूँ कि यहाँ रोजगार एवं स्वरोजगार के अधिक-से-अधिक अवसर विकसित हों, ताकि उनके शिक्षा, ज्ञान, कौशल एवं अनुभव का राज्य को अधिक-से-अधिक लाभ हो सकें और हमारे प्रतिभाओं को पलायन नहीं करना पड़े।
 शिक्षा और ज्ञान की ताकत हमारे भीतर आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की अलख जगाती है, आत्मबल देती है।
 भारत विश्वगुरु के रूप में जाना जाता रहा है। हमारे देश ने दुनिया को योग दर्शन, मानवता एवं विकास का मार्ग दिखाया। इतिहास में एक दौर वह आया जब ताकतवर सैन्य साम्राज्य वाले देशों का था, एक दौर ताकतवर अर्थव्यसथा वाले साम्राज्यों का दौर। अगला दौर भारत का होगा, जब भारत योग दर्शन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उन्नत तकनीक से पूरी दुनिया को मार्ग दिखायेगा। इसका उदाहरण देश के प्रतिभावान वैज्ञानिकों द्वारा बहुत ही कम समय में तैयार की पूरी दुनिया में सबसे प्रभावशाली कोरोना वैक्सीन है।
 यहाँ नालंदा एवं तक्षशीला जैसे विश्वप्रसिद्ध व ख्यातिप्राप्त ज्ञान के केन्द्र थे, जहाँ पूरे विश्व से विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने आते थे और आज हमारे यहाँ के विद्यार्थी उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए विदेश जाने के लिए इच्छुक रहते हैं। हमें इसके कारण जानने होंगे और इस दिशा में कार्य करना होगा। इस स्थिति में परिवर्तन लाना होगा, विश्वविद्यालयों के स्तर में सुधार लाना होगा ताकि विश्व के उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में हमारे शिक्षण संस्थानों की भी गणना हो सकें।
 मुझे विश्वास है कि प्रतिकूलता को अनुकूलता में बदलने के लिए आप सफल व शिक्षित युवा परिपक्वता का परिचय देते हुए समाज के दिशा-निर्देशक की भूमिका निभायेंगे। साथ ही अपने अंदर मौजूद नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने की दिशा में बड़ी भूमिका निभाने की कोशिश करें। आप लोग शिक्षित एवं जागरूक हैं। प्रत्येक व्यक्ति की खास पहचान उसका हुनर है। शिक्षित, कुशल और हुनरमन्द विशिष्ट युवा समय की जरूरत है।
 शिक्षा ऐसी हो जो सर्वसुलभ हो, विद्यार्थी एक सामाजिक, सु-संस्कृत और कुशल नागरिक के रूप में विकसित हों। वे नैतिकवान एवं चरित्रवान हों। ऐसे नागरिक निश्चित रूप से देश और समाज के लिए अमूल्य संपदा सिद्ध होंगे।  आज वैश्विक फलक पर भारत ने अपनी अलग और विशिष्ट पहचान बनायी है। पूरा विश्व हमारे देश को सम्मान और उम्मीद भरी दृष्टि से देख रहे हैं। हमारा देश युवाओं का देश है। युवाओं में स्थित रचनात्मक शक्ति और रचनात्मक ऊर्जा पर समाज भरोसा करता है।
 आप देश के भरोसे पर खरा उतरें, कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच एवं प्रतिबद्धता के साथ अपना कर्म करते रहे। इस मार्ग पर समय की कसौटी पर आप सभी खरा उतरे, आपकी पहचान बने।
 आप अपने ज्ञान, विवेक, क्षमता और कार्य कुशलता से झारखण्ड के विकास को गति दें, आपको आपकी मंजिल मिले, आपके सपने पूरे हों। आप अपने जीवन में सफल हो और आपका परिवार आप पर गर्व करे, यही मेरी दुआएं और आपको आशीर्वाद है।
जय हिन्द! जय झारखंड!
04 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने आज कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाई।
03 February 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से झारखंड विधानसभा सदस्य श्री अमित कुमार यादव ने राज भवन में भेंट कर राज्य के सात जिलों यथा हजारीबाग,कोडरमा, चतरा, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो एवं रामगढ़ में लोड शेडिंग एवं विद्धुत समस्या सबंधी विषयों का उल्लेख करते हुए उक्त समस्याओं के निदान हेतु ज्ञापन सर्मपित किया।