Press Releases:-2022
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27 April 2022
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से नई दिल्ली में माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने भेंट की।
27 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से नई दिल्ली में भेंट की तथा राज्य की विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया।
26 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने राज भवन, चंडीगढ़, हरियाणा में हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय से भेंट की।
26 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने चंडीगढ़, राज भवन, पंजाब में पूज्य संत प्रवर श्री विजय कौशल जी महराज जी द्वारा प्रस्तुत श्री राम कथा अमृत वर्षा कार्यक्रम में भाग लिया।
उक्त अवसर पर माननीय राज्यपाल, पंजाब और प्रशासक, चंडीगढ़ श्री बनवारीलाल पुरोहित जी भी मौजूद थे।
दिनांक 26 अप्रैल, 2022 को पंजाब राज भवन, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित श्री राम कथा के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन-
 सर्वप्रथम, मैं माननीय राज्यपाल, पंजाब और प्रशासक, चंडीगढ़ श्री बनवारीलाल पुरोहित जी को इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए बधाई देता हूँ और उनका आभार प्रकट करता हूँ कि इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित किया। मैं राज भवन, पंजाब के सभी अधिकारियों व कर्मियों को भी बधाई देता हूँ।
 यह मेरा सौभाग्य है कि परम पूज्य संत प्रवर श्री विजय कौशल जी महाराज के श्रीमुख से मुझे श्री राम कथा सुनने का अवसर प्राप्त होने जा रहा है। मैं महाराज जी के प्रति अपना आभार प्रकट करता हूँ तथा झारखंड की जनता की सुख, समृद्धि के लिए उनसे आशीर्वाद माँगता हूँ।
 जब भी धार्मिक स्थलों व कार्यक्रमों में जाता हूँ तो मैं वहाँ कथा, भजन, कीर्तन आदि सुनना पसंद करता हूँ, न कि भाषण देना। भजन, कीर्तन, कथाओं को सुनने से मन को सुकून तो प्राप्त होता ही है, चित को एक अलग प्रकार की शांति की अनुभूति प्राप्त होती है।
 जो कण-कण में बसे हैं, वही राम है। श्रीराम के जीवन की अनुपम कथाएं महर्षि वाल्मिकी जी ने बड़े ही सुंदर ढ़ंग से रामायण में प्रस्तुत किया है। इसके अतिरिक्त गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस रच कर जन-जन के हृदय तक श्रीराम के विचारों व आदर्शों को पहुंचाने का सफल कार्य किया।
 करुणा, त्याग और समर्पण की मूर्ति भगवान राम ने विनम्रता, मर्यादा, धैर्य और पराक्रम के उदाहरण संसार के सामने प्रस्तुत किया। भगवान राम को दुनिया में एक आदर्श पुत्र के रूप में माना जाता है।
 भगवान श्री राम सिर्फ एक आदर्श पुत्र के साथ आदर्श पति, आदर्श भाई, आदर्श मित्र, आदर्श शिष्य और आदर्श राजा भी थे। उनके लिए जन-सेवा सर्वोपरि था। वे प्रजा के हर सुख-दुःख में उनके साथी थे। इसलिए प्रजा भी उनसे उतना ही प्रेम करती थी। भगवान राम आदर्श व्यक्तित्व के प्रतीक हैं।
 शबरी के जूठे बेर खाकर, उन्होंने सबके सामने एक आदर्श रखा कि सच्चे प्रेम के आगे बडेि से बड़े व्यक्ति को झुकना पड़ता है। साथ ही, इसमें अस्पृश्यता का समाज से उन्मूलन करने का संदेश निहित है। निषाद राज से घनिष्ट मित्रता जाति विभेद को दूर करने की प्रेरणा देता है।
 जिस प्रकार वेदों व शास्त्रों ने मानव के बेहतर भविष्य संबंधी कई मंत्र दिये, उसी प्रकार रामायण ने मानव जीवन को बेहतर जीवन जीने के तरीके सिखाए हैं। जो व्यक्ति रामायण में लिखी बातों व श्री राम के आदर्श को आत्मसात कर ले, वह अपने जीवन में आए समस्त दुखों से लड़ने की क्षमता रख सकता है।
 रामायण, रामचरितमानस ऐसे पवित्र ग्रंथ है जो रामकथा के माध्यम से विश्व समुदाय के समक्ष मानव जीवन के उच्च आदर्शों और मर्यादाओं को प्रस्तुत करते हैं। इन ग्रन्थों में भारत की आत्मा के दर्शन होते हैं।
 रामकथा सर्वदा लोकप्रिय बनी रहेगी। रामकथा की लोकप्रियता सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विश्वव्यापी है। भारत ही नहीं विश्व की अनेक लोक-भाषाओं और लोक-संस्कृतियों में रामायण और भगवान राम के प्रति सम्मान और प्रेम झलकता है।
 एक बार पुनः माननीय राज्यपाल, पंजाब और प्रशासक, चंडीगढ़ श्री बनवारीलाल पुरोहित जी का श्री राम कथा के आयोजन के लिए बधाई।
जय सिया राम!
23 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से केन्द्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
21 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से आज रामकृष्ण मिशन टीबी सेनेटोरियम, तुपुदाना के स्वामी सत्संगानंद जी ने राज भवन में भेंट की तथा संस्था की गतिविधियों से अवगत कराया।
21 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से पाणिनी फाउंडेशन का एक शिष्टमंडल ने श्रीमती रमा पोपली के नेतृत्व में राज भवन में भेंट की तथा बाल सुलभ शिक्षण संसाधन के माध्यम से बच्चों के शैक्षणिक विकास के संदर्भ में अवगत कराया।
21 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा का एक शिष्टमंडल राज्य के पूर्व मंत्री श्री लालचंद महतो के नेतृत्व में राज भवन में भेंट कर राज्य के पिछड़े समाज के आरक्षण में वृद्धि करने हेतु पहल करने संबंधी ज्ञापन समर्पित किया।
21 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से पद्मश्री श्री अशोक भगत ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
21 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से पूर्व मंत्री श्रीमती गीतश्री उरांव के नेतृत्व में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद का शिष्टमंडल ने माननीय राष्ट्रपति महोदय को संबोधित ज्ञापन पत्र समर्पित किया। ज्ञापन के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्रों में आदिकाल से वास करने वाले आदिवासियों की प्राचीन परंपरागत रूढ़िवादी सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक व्यवस्थाओं को अक्षुण्ण बनाए रखते हुए एवं उनकी जमीन पर गैर आदिवासियों के द्वारा अवैध कब्जा एवं विस्थापन मुक्त कर संविधान में प्रदत्त विशेषाधिकार के तौर पर अनुच्छेद 244 (1) एवं संविधान के प्रावधान 5वीं अनुसूची के तहत कानून को व्यवस्थित कर, लागू करने हेतु आग्रह किया गया है।
21 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स), जिंदल स्टील एण्ड पावर कर्नल समित कुमार साहा (सेवानिवृत्त) ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
20 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राज भवन में भेंट की। राज्यपाल महोदय ने उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। उक्त अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी भी मौजूद थे।
18 April 2022
माननीय राज्यपाल महोदय ने पलामू में तेतरी चंद्रवंशी फार्मेसी कॉलेज, विश्रामपुर एवं लक्ष्मी चंद्रवंशी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर का उद्घाटन किया वे रामचंद्र चंद्रवंशी विश्वविद्यालय परिसर स्थित मंदिर में दर्शन हेतु भी गये
राज्यपाल महोदय ने रामचंद्र चन्द्रवंशी विश्वविद्यालय, विश्रामपुर, पलामू द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में भाग लिया तथा विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की।
दिनांक 18 अप्रैल, 2022 को रामचंद्र चन्द्रवंशी विश्वविद्यालय, विश्रामपुर, पलामू के दीक्षांत समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन:-
-महान स्वतंत्रता सेनानी नीलाम्बर-पीताम्बर की इस पावन भूमि में स्थापित रामचन्द्र चन्द्रवंशी विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी के बीच सम्मिलित होकर अपार हर्ष हो रहा है।
- इस अवसर मैं आप सभी को हार्दिक बधाई व शुभकामनायें देता हूँ, विशेषकर उपाधि ग्रहण करने वाले प्रिय विद्यार्थियों को। आपकी इस उपलब्धि में योगदान देने वाले सभी शिक्षक और अभिभावक भी बधाई के पात्र हैं।
-पलामू क्षेत्र वीरों की भूमि रही है। इस माटी में नीलांबर-पीताम्बर जैसे सपूत हुए, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी वीरता से अंग्रेजों का कड़ा मुक़ाबला किया तथा अन्य लोगों को भी आजादी की लड़ाई में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। भारत माता के ऐसे वीरों सपूतों को मैं कोटि-कोटि नमन करता हूँ और उनके प्रति अपनी श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ।
-आज रामचन्द्र चन्द्रवंशी विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह है। यह क्षण हर उपाधि ग्रहण करने वाले विद्यार्थी के लिए विशेष तो होता ही है, लेकिन अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का कार्य करता है।
-मैं, श्री रामचन्द्र चंद्रवंशी जी को शिक्षा के क्षेत्र में कार्य आरंभ करने की सोच की सराहना करता हूँ। राज्य में स्थापित इस निजी विश्वविद्यालय से सबको अत्यंत अपेक्षाएं हैं। विश्वविद्यालयों में एक बेहतर आधारभूत संरचना का होना अति आवश्यक है। यू.जी.सी. की गाइडलाइन्स और मापदण्डों का पालन भी सुनिश्चित होना चाहिये। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रहित का सदा ध्यान रखें।
-यहाँ से पढ़े हुए विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर इस विश्वविद्यालय का नाम रौशन करें और गर्व से कह सके कि जीवन में जो उन्होंने सफलता प्राप्त की है उसमें उनके विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान है।
-हमेशा ध्यान रखें कि आप विद्यार्थी इस संस्थान की पूँजी हैं और इसके ब्रांड एम्बेसडर हैं। आपके द्वारा किया गया अच्छा कार्य आपके विश्वविद्यालय को कहीं न कहीं प्रभावित करेगा। इस राज्य में स्थापित निजी विश्वविद्यालय शिक्षा जगत में अपना उल्लेखनीय योगदान देकर अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों के लिए अनुकरणीय बनें।
-पहले स्कूल और विश्वविद्यालय सरकार के अधीन होते थे। जब से सरकार ने शिक्षा को निजी क्षेत्र में आने की अनुमति दी, उसके बाद निजी क्षेत्र में अनेक विश्वविद्यालय प्रारंभ हुए। सरकारी तथा निजी क्षेत्र में विद्यालय और विश्वविद्यालय की वजह से उनमें आपस में प्रतिस्पर्धा होने के कारण छात्रों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान को चयन करने का मौका मिलता है और निजी संस्थान और भी अच्छा करने की सोचते हैं और शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
-यह विश्वविद्यालय अपनी उत्कृष्ट शिक्षण शैली से इस क्षेत्र के अन्य शिक्षण संस्थानों को भी प्रेरित करें तथा कभी पिछड़ा व उग्रवाद प्रभावित कहलाने वाला यह क्षेत्र ज्ञान का अहम केन्द्र बने, एजुकेशन हब बने, जहाँ पूरे राज्य व देश के बच्चों के लिए ज्ञान हासिल करना गर्व की बात हो। इसके लिए आपके संस्थान को कठिन परिश्रम करना होगा।
-किसी भी शिक्षण संस्थान को समाज का विश्वास प्राप्त होना अति आवश्यक है। इसलिए आपको जन-अपेक्षाओं को पूर्ण करने की दिशा में कार्य करना होगा, जिससे कि विद्यार्थी बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन करें।
-मैं चाहता हूँ कि इस राज्य के अधिक से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण करें, जिसमें जाति, धर्म व लिंग कोई रुकावट न बने। खुशी होती है देखकर कि अब झारखंड की बेटियाँ न केवल उच्च शिक्षा ग्रहण करने के प्रति रूचि रख रही हैं, बल्कि बहुत ही अच्छा कर रही हैं और अपनी प्रतिभा से हर क्षेत्र में नए-नए कृतिमान स्थापित कर रही हैं।
-भविष्य को दिशा देने का उत्तरदायित्व आप युवाओं पर ही हैं और युवाओं को सही दिशा देने की ज़िम्मेदारी आप जैसे शिक्षण संस्थानों की ही हैं। -मेरे प्रिय विद्यार्थियों, आज आप उपाधि ग्रहण कर रहे हैं, अपने आपको सिर्फ डिग्री प्राप्त करने तक ही सीमित न रखें, डिग्री लेना ही आपका मकसद नहीं होना चाहिये। आपको अपने जीवन के कर्म-क्षेत्र में अपनी दक्षता एवं प्रतिभा से एक विशिष्ट पहचान बनानी है। आप जिस किसी भी क्षेत्र में कार्य करें, आपको सदा उसमें उत्कृष्टता हासिल करने की ललक होनी चाहिये।
-ज्ञान आधारित प्रतियोगिता के इस युग में विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होना आवश्यक है। शिक्षण संस्थानों की यह कोशिश होनी चाहिए कि विद्यार्थी एक सामाजिक, सु-संस्कृत और कुशल नागरिक के रूप में विकसित हों। नैतिकवान एवं चरित्रवान हो तभी वे निश्चित रूप से देश और समाज के लिए अमूल्य संपदा सिद्ध होंगे।
-आप विद्यार्थी सच्चे मन से ज्ञान हासिल करने के साथ-साथ अपने जीवन में अनुशासन, विनम्रता, नैतिकता और परोपकार के मार्ग पर चलें। समाजहित में कार्य करें व दूसरों के कल्याण करने के लिए सदा तैयार रहें।
-मुझे बताया गया कि इस विश्वविद्यालय में स्नातक कला, वाणिज्य एवं विज्ञान के अतिरिक्त अभियंत्रण, शिक्षा, बी०फार्मा, बी०एस०सी० नर्सिंग, बी०पी०एड० सहित कई विषयों में पी०जी० की पढ़ाई शुरु की गई है।
-खुशी की बात है कि मेडिकल कॉलेज में पठन-पाठन प्रारम्भ हो चुका है। आशा है कि यह मेडिकल कॉलेज देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में अपना एक विशिष्ट स्थान बनाने का प्रयास करेगा। यहाँ से पढ़े चिकित्सक उच्च कोटि के ऐसे चिकित्सक हो, जो समाज के प्रति संवेदनशीलता दिखाये तथा अपने कार्यों एवं आचरण से सम्पूर्ण चिकित्सा जगत को सुशोभित करें।
-श्री रामचन्द्र चंद्रवंशी जी, आप एक जन-प्रतिनिधि भी हैं और सर्वश्रेष्ठ विधायक से भी सम्मानित हो चुके हैं, ऐसे में आपसे जन-अपेक्षायें और भी बढ़ जाती है। मैं चाहूँगा कि आप इस क्षेत्र में शिक्षा जगत में एक ऐसा वातावरण स्थापित करें, जहाँ हर किसी को ज्ञान प्राप्त करने की लालसा हो तथा कोई भी व्यक्ति शिक्षा ग्रहण करने से वंचित न रहें।
-यह विश्वविद्यालय सामाजिक दायित्वों के तहत आस-पास के ग्रामों को भी गोद ले तथा वहाँ की समस्याओं को जानकर उनके निवारण करने का प्रयास करे। यहाँ के विद्यार्थी देश के भरोसे पर खरा उतरें। कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच एवं प्रतिबद्धता के साथ अपने लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ें, लक्ष्य को प्राप्त करें तथा राष्ट्रहित में सदा कार्य करें।
-एक बार पुनः आप सभी उपाधि ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को मेरी हार्दिक शुभकामनायें। आप अपने जीवन में हमेशा यश एवं कृति हासिल करें, आपको अपनी मंजिल मिले, आपके सपने पूरे हों। मेरा आशीर्वाद सदा आपके साथ है।
जय हिन्द! जय झारखंड!
15 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से सिंघानिया फ्रेंड्स फॉरम के निर्देशक श्री कमल सिंघानिया एवं श्री बिमल सिंघानिया ने राज भवन में भेंट की तथा सिंघानिया फ्रेंड्स फॉरम के अपने वर्तमान एवं आगामी शिक्षण संस्थाओं के बारे में अवगत कराया। राज्यपाल महोदय ने उन्हें बधाई दी एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।
15 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से गायत्री शक्तिपीठ, सेक्टर-2, धुर्वा का एक शिष्टमंडल श्री जटा शंकर झा के नेतृत्व में राज भवन में भेंट कर संस्था की गतिविधियों से अवगत कराया।
14 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने पुलिस लाईन परेड मैदान, काँके रोड में सीमा सुरक्षा बल द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के तहत जाबांज़ सेनानियों द्वारा किये गये मोटरसाइकिल शो को देखकर उनका उत्साहवर्धन किया।
14 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से अपर पुलिस महानिदेशक, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा श्रीमती सुमन गुप्ता ने राज भवन में भेंट कर उन्हें 'अग्निशमन सेवा सप्ताह' का बैच लगाया। इस अवसर पर राज्यपाल महोदय ने अग्निशमन सेवा सप्ताह की शुभकामनाएं दी। उक्त अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री को भी अग्निशमन सेवा सप्ताह का बैच लगाया गया।
14 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने डोरंडा, राँची स्थित भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा-सुमन अर्पित की।
14 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
14 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर राज भवन में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा-सुमन अर्पित की।
13 April 2022
सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के छठे दीक्षांत समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल-सह-झारखंड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति महोदय का अभिभाषण:-
Ø सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह के इस शुभ अवसर पर मैं आप सभी को बधाई व शुभकामनायें देता हूँ। विशेष रुप से, उन विद्यार्थियों को जो आज उपाधि प्राप्त कर रहे हैं।
Ø तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय से सन् 1992 में विभाजित होकर सृजित यह विश्वविद्यालय हूल क्रान्ति के अमर महानायकों सिदो एवं कान्हु के नाम पर स्थापित है। सर्वप्रथम, मैं उन शहीदों को नमन करता हूँ और उनके प्रति अपनी श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ।
Ø दीक्षांत समारोह का अपना एक विशेष महत्व है। विद्यार्थियों के चेहरे पर मुस्कान, उमंग और उत्साह इस समारोह की गरिमा को और बढ़ा देता है।
Ø उपाधि ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए यह दीक्षांत समारोह एक अहम अवसर है जिसमें उनके वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम दिखाई देता है। हमारे विद्यार्थियों में निहित प्रेरणादायक विचार उनके जीवन को प्रगति के मार्ग पर ले जाने की ताकत रखता है, उनमें देश और समाज को विकास के नये मुकाम पर ले जाने की क्षमता है।
Ø यह क्षण विद्यार्थियों के लिए अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करने के साथ-साथ आगामी जीवन सफर तय करने की दिशा में एक नया कदम रखने की खुशी एक नये दायित्वों को निभाने के लिए भी प्रेरित करता है।
Ø उच्च शिक्षा की डिग्री हासिल करना निश्चित रूप से सौभाग्य और उपलब्धि की बात है। गर्व और उपलब्धि के इस उचित भाव के साथ ही भविष्य के बारे में आशा और उम्मीद भी है। मैं आज इस अवसर पर आपसे कहना चाहता हूँ आप अपने सपनों और विचारों को मूर्त रूप प्रदान करने की दिशा में नई यात्रा का आरंभ करें।
Ø आज आपके जीवन का एक नया अध्याय शुरु हो रहा है। प्रतियोगिता के इस युग में उत्कृष्टता हासिल करना जरूरी भी है और चुनौती भी। आज तक आपने सिर्फ पुस्तकों और शिक्षकों से ज्ञान प्राप्त किया है, पर आज के बाद पूरी दुनिया आपके सामने एक विस्तृत पुस्तकालय के रुप में खुल जायगी।
Ø आपकी विचारों एवं कर्मों में उदारता, नैतिकता एवं संकल्प हो और हृदय में परोपकार की भावना हो। आपकी वाणी और आपके व्यवहार में विनम्रता एवं मर्यादा हो। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने और नौकरी पाने का माध्यम नहीं है। शिक्षा का मूल उद्देश्य है, चरित्र निर्माण।
Ø शिक्षा का कार्य खाली दिमाग को खुले दिमाग में बदलना है। इसके लिए जरूरी है कि शिक्षक अपने हृदय में सहानुभूति और समर्पण को जगह दे ताकि विद्यार्थियों को समझ सके, उनकी समस्याओं को जान सके, पहचान सके और उसके निदान का मार्ग प्रशस्त कर सके।
Ø आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हम अपनी इस युवा शक्ति का तभी लाभ उठा सकते हैं, जब हमारी युवा पीढ़ी ज्ञान और कौशल से युक्त हो। इसके लिए हमारे शिक्षण संस्थानों को, खासकर विश्वविद्यालयों को इस संदर्भ में बड़ी भूमिका निभानी है। उन्हें विद्यार्थियों को शिक्षित एवं निपुण नागरिक बनाने में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करना होगा ताकि राष्ट्र निर्माण के कार्य में वे अहम भूमिका सुनिश्चित कर सके।
Ø विद्यार्थियों में अपने विश्वविद्यालय का नाम देश के उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों में स्थापित करने की ललक होनी चाहिये। आपको इस दिशा में सोचना होगा और उसके लिए परिश्रम भी करना होगा।
Ø जनजातीय बहुल क्षेत्र में स्थापित सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय से यह अपेक्षा है कि वे अपनी उपलब्धियों से अधिक से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने हेतु प्रेरित करें। विश्वविद्यालय परिवार छात्रहित में विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य निर्माण हेतु सदा सजग रहें एवं गुणात्मक शिक्षा प्रदान करें।
Ø निश्चित रूप से राज्य में उच्च शिक्षा के दायरे का विस्तार हुआ है और आज हमारे शिक्षण संस्थानों में पहले से कहीं अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। लेकिन, हमें जिस बात पर अब भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, वह है शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं के लिए सर्वोत्तम संभव शिक्षा।
Ø हमारे शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को बेहतर नागरिक बनने की भी प्रेरणा दें ताकि वे राष्ट्र के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करने हेतु सदा सक्रिय रहें। यहाँ के विद्यार्थी अपने ज्ञान और कर्म से इस राज्य ही नहीं पूरे देश का नाम रौशन करें तथा अन्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनें। हमारे विद्यार्थी सिदो-कान्हु, चाँद-भैरव, फूलो-झानो के जीवन से भी प्रेरणा लें।
Ø विश्वविद्यालय का उद्देश्य मानवीय मूल्यों व आदर्शों का विस्तार करना और उन्हें व्यापक जन-समाज तक फैलाना होता है। यही नहीं, विश्वविद्यालय सामाजिक, सांस्कृतिक रचनात्मकता के केन्द्र बिन्दु होते हैं। यदि यह इमारत और शिक्षक उपलब्ध दो संसाधन कहे जाते हैं तो निश्चित रूप से आप विद्यार्थी विश्वविद्यालय का तीसरा संसाधन हों।
Ø वास्तव में शिक्षण की असली खुशी अपने विद्यार्थियों में निहित प्रतिभा व खोज क्षमताओं को बाहर निकालना है। शिक्षा आपके अंदर आत्मविश्वास जगाती है किंतु आपको आत्मविश्वासी होने के साथ विनम्र भी होना आवश्यक है। ज्ञान एवं विनम्रता से जीवन में प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
Ø झारखंड की कला-संस्कृति अत्यंत समृद्ध है और इसकी विश्व स्तरीय पहचान है। मैं चाहता हूँ कि यहाँ के शिक्षण संस्थान एवं विद्यार्थी अपनी लगन से शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहतर कर विश्वपटल पर इसकी विशिष्ट पहचान कायम करें ताकि अन्य राज्यों के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आयें।
Ø यहाँ शिक्षा हासिल करना एक प्रतिष्ठा का विषय माना जाय। इसके लिए हमारे शिक्षकों को शिक्षा के प्रति पूर्णतः समर्पित रहना होगा तथा विद्यार्थियों को हर कदम पर संतान की तरह मार्गदर्शन करना होगा।
Ø मालूम पड़ा है कि विश्वविद्यालय ने बहुत सारे ऐसे पाठयक्रम शुरु किए हैं जैसे एन.सी.सी., डिफेन्स स्टडीज, फॉउडेशन कोर्स इन इंगलिश और टी०आर०एल० में बहुविषयक पी०जी० विषय, जो इस विश्वविद्यालय से पास करने वाले विद्यार्थियों को उनके कैरियर में काफी मदद करेगा।
Ø एक बार पुनः उपाधि ग्रहण करने वाले सभी विद्यार्थियों को मेरी बधाई। मेरी कामना है कि आप सफलता की ऊँचाई को हासिल करें व अपने लक्ष्य को प्राप्त करें।
Ø अंत में, मैं पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन को इस छठे दीक्षांत के सफल आयोजन के लिए बधाई देता हूँ।
जय हिन्द! जय झारखंड!
12 April 2022
राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पित और असाधारण सेवा के लिए भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को प्रथम 'लता दीनानाथ मंगेशकर' पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई।
11 April 2022
2022 झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल-सह-विजिटर महोदय का सम्बोधन:-
 झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में आप सभी के बीच आकर मुझे हार्दिक खुशी हो रही है। उपाधि ग्रहण करने वाले सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य हेतु मेरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। मैं उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई देना चाहूँगा, जिनके कारण इन विद्यार्थियों ने यह उपलब्धि हासिल की है।
 दीक्षांत समारोह सभी उपाधिधारकों के लिए महत्वपूर्ण और उत्साहपूर्ण अवसर होता है और विद्यार्थियों को अपने भविष्य का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करता है। यहाँ से आपकी ज़िंदगी की कसौटी आरंभ होती है। उपाधिधारक विद्यार्थियों के सामने उनका सुनहरा भविष्य प्रतीक्षा कर रहा है।
 यह क्षण विद्यार्थियों के लिए अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करने के साथ आगामी जीवन सफर तय करने की दिशा में एक नया कदम भरने का रोमांच एवं नये दायित्वों को भी निभाने को प्रेरित करता है। अब आपको जीवन में अपना मार्ग स्वयं ढूँढना हो और बनाना है।
 जीवन में कुछ पाने के लिए हमेशा मन में सीखने की इच्छा व लालसा रखनी चाहिए। आप अपने ज्ञान व विवेक का उपयोग करते हुए सदा अपने कर्मों से स्वयं का, अपने समाज, अपने शिक्षण संस्थान के साथ राज्य व राष्ट्र का नाम रौशन करें।
 आप विद्यार्थियों पर एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी है। आपको सामाजिक मुद्दों को विवेकपूर्ण तरीके से देखने की जरूरत है।
 हमने अपने देश में उच्च शिक्षा के दायरे का काफी विस्तार किया है और आज हमारे शिक्षण संस्थानों में पहले से कहीं अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। लेकिन, हमें जिस बात पर अब भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, वह है शिक्षा की गुणवत्ता और यह सुनिश्चित करना कि हम अपने युवाओं के लिए सर्वोत्तम संभव शिक्षा प्रदान करायें।
 हमारा दायित्व सिर्फ विद्यार्थियों को किताबों तक सीमित रखना, उन्हें स्वर्ण पदक देना, डिग्रियाँ बाँटना तक ही सीमित नहीं होना चाहिये, अपितु उनमें चेतना जागृत कर उनमें जीवन में बेहतर करने की भूख जगाना, उनकी प्रतिभा को उभारना, उनमें आत्मनिर्भरता पैदा करना और उन्हें एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व देना होना चाहिये।
 यह बहुत ही सुखद बात है कि आज हमारी बेटियाँ शिक्षा के प्रति काफी जागरूक हैं और काफी अच्छा भी कर रही हैं। कहा जाता है कि एक बेटी पढ़ती है तो वह पूरे परिवार व समाज को शिक्षित करती है। अगर समाज शिक्षित हो जाएगा तो बाल विवाह, दहेज-प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयाँ अपने-आप ही समाप्त हो जायेगी।
 मेरा मानना है कि किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए उसके विद्यार्थी ही उसकी पूंजी और ब्रांड एम्बेसडर होते हैं क्योंकि ये विद्यार्थी ही जब जीवन में बेहतर मुकाम हासिल करते हैं तो कहीं ना कहीं उनकी सफलता के साथ उस संस्थान की भी एक विशिष्ट पहचान बनती है और नाम होता है।
 मैंने हमेशा कहा है कि विश्वविद्यालयों में बेहतर आधारभूत संरचना का होना अति आवश्यक है। मेरे द्वारा राज्य के निजी विश्वविद्यालय के कुलपतियों के साथ समीक्षा बैठक में राज्य में स्थापित हर विश्वविद्यालय को निदेश दिया गया कि वे यू०जी०सी० के मापदंडों का पालन सुनिश्चित करे एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु तत्पर रहे।
 मैं चाहता हूँ कि राज्य में स्थापित निजी विश्वविद्यालय छात्रहित में समर्पित भाव से कार्य करें एवं अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों के अनुकरणीय बनें।
 शिक्षा को वर्तमान और भावी चुनौतियों का सामना करने के लिए विद्यार्थियों को ज्ञान व कौशल से युक्त करने के साथ उनमें मानवीय मूल्यों, नैतिकता को भी बढ़ावा देना चाहिए। एक मजबूत नैतिक दृष्टिकोण वाला व्यक्ति अडिग रहेगा और सत्यनिष्ठा के साथ समझौता नहीं करेगा। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य में सर्वश्रेष्ठ गुणों को विकसित और व्यक्ति का समग्र विकास करना होना चाहिए।
 किसी भी शिक्षण संस्थान को समाज का विश्वास प्राप्त होना बहुत जरूरी है। मैं चाहता हूँ कि हमारे विश्वविद्यालय जन-अपेक्षाओं को पूर्ण करने की दिशा में आगे बढ़ें, वे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के साथ सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन करें।
 शिक्षा एक ऐसा आधार है जिस पर किसी राष्ट्र एवं उसके लोगों की प्रगति निर्भर करती है। हमें अपने गौरवशाली अतीत को नहीं भूलना चाहिए, जहाँ दुनिया भर के शोधकर्ता और ज्ञान-साधक नालंदा और तक्षशिला जैसे शिक्षा केंद्रों में अध्ययन के लिए आते थे।
 निजी विश्वविद्यालयों को अपने ‘प्लेसमेंट सेल’ को भी प्रभावी बनाने की दिशा में ध्यान देना जरूरी है। विश्वविद्यालय को टीम वर्क की भावना से कार्य करते हुए विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सदाचार आदि जैसे नैतिक गुणों को विकसित करने की दिशा में भी ध्यान देना चाहिये।
 हमारा देश युवाओं का देश है और हमें अपने युवाओं में स्थित रचनात्मक शक्ति और रचनात्मक ऊर्जा पर पूर्ण उम्मीद है। भविष्य को दिशा देने का उत्तरदायित्व हमारे युवाओं पर ही है और युवाओं को सही दिशा देने का अहम कार्य हमारे शिक्षण संस्थानों का ही है।
 आप देश के विश्वास पर खरा उतरें, कठिन परिश्रम करें, अपना आत्मविश्वास बढ़ायें, सकारात्मक सोच रखें और प्रतिबद्धता के साथ अपने कर्म करते रहें ताकि आपकी एक विशिष्ट और अलग पहचान बने तभी आप देश और समाज के लिए अमूल्य संपदा सिद्ध होंगे।
 आपको आपकी मंजिल मिले, आपके सपने पूरे हों। आप अपने जीवन हर पग पर कामयाबी हासिल करें, मेरा आशीर्वाद सदा आपके साथ है।
जय हिन्द! जय झारखंड!
11 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं झारखण्ड विधानसभा सदस्य श्री बाबूलाल मरांडी तथा राज्यसभा सांसद श्री दीपक प्रकाश ने राज भवन में शिष्टाचार भेंट की।
11 April 2022
विश्वप्रसिद्ध धार्मिक स्थल देवघर के त्रिकुट पर्वत पर बने रोपवे हादसा अत्यन्त दुखद व पीड़ादायक है। मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ तथा बाबा बैद्यनाथ से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।
10 April 2022
आप सभी को रामनवमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का जीवन समस्त मानव जाति के लिए आदर्श व प्रेरणास्रोत है। भगवान श्री राम की असीम कृपा सदैव सभी पर बनी रहे, यही प्रार्थना है। जय श्री राम!
08 April 2022
कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के पंचम दीक्षान्त समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल-सह-झारखण्ड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति महोदय का दीक्षान्त अभिभाषण:-
 कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के पंचम दीक्षान्त समारोह के अवसर पर मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
 सर्वप्रथम, इस अवसर पर मैं उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को बधाई देता हूँ तथा उनके आने वाले जीवन में सफलता के लिए मंगलकामना के साथ उनको अशीर्वाद देता हूँ। सभी पदक विजेता विद्यार्थी विशेष प्रशंसा के पात्र हैं। साथ ही, शिक्षकों एवं अभिभावकों को भी मैं हार्दिक बधाई देता हूँ जिनके अथक प्रयास से आप विद्यार्थियों ने यह सफलता प्राप्त की है।
 दीक्षांत समारोह के आयोजन हेतु मैं समस्त विश्वविद्यालय परिवार को भी बधाई देता हूँ। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन में विशेष महत्व रखता है, यह उनके जीवन का अविस्मरणीय और मूल्यवान पल होता है। मेरी अपेक्षा है कि भविष्य में विश्वविद्यालय द्वारा समय पर दीक्षांत समारोह आयोजित किये जाते रहेंगे ताकि विद्यार्थियों को समय पर डिग्री दी जा सकें।
 मुझे पूर्ण विश्वास है कि कोल्हान विश्वविद्यालय से आज उपाधि ग्रहण करने वाले समस्त होनहार व सफल विद्यार्थी राष्ट्रहित में बढ़-चढ़ कर काम करेंगे।  प्रिय विद्यार्थियों, यहाँ आपने जो ज्ञान अर्जित किया है, उसके द्वारा आप अपने नए एवं चुनौतीपूर्ण जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। आप जो भी पेशा चुनेंगे, उसमें आपको विश्वविद्यालय में रहने के दौरान प्राप्त हुए ज्ञान को प्रदर्शित करने के अवसर प्राप्त होंगे, प्रतियोगिता के इस युग में अपनी प्रतिभा से आपको उत्कृष्टता हासिल करनी होगी।
 शिक्षा का लक्ष्य मात्र उपाधि प्राप्ति तक सीमित नहीं है या केवल धन प्राप्ति का जरिया भी नहीं है। शिक्षा मनुष्य को चरित्रवान बनाने के साथ-साथ उत्तम नागरिक भी बनाने का कारगर साधन है।
 ज्ञान ही सबसे महत्वपूर्ण पूंजी है। सदैव कुछ न कुछ नया जानने और सीखने वाला व्यक्ति ही इस दौर की चुनौतियों का सामना कर सकेगा।
 शिक्षा सीमित अर्थ में बेहतर जीवन की तैयारी है और बड़े अर्थ में कहा जाए तो, यह जीवन का परम उद्देश्य है। नैतिकता तथा अन्य चारित्रिक गुणों को आत्मसात करना भी शिक्षा का ही अनिवार्य अंग है।
 जिज्ञासा, उत्साह और सतर्कता के साथ अपने ज्ञान, कौशल और बुद्धि का सदैव विकास करने वाले व्यक्ति के लिए आज अपार अवसर भी उपलब्ध हैं। केवल अपने कौशल के बल पर आधुनिक टेक्नॉलॉजी के जरिए अनेक भारतीय युवाओं ने विश्वस्तरीय सफलताएं अर्जित की हैं।
 शिक्षा राष्ट्र के आर्थिक-सामाजिक विकास का शक्तिशाली साधन है। ज्ञान से ही वास्तविक सशक्तीकरण आता है। यदि हमारे देश को उच्च विकास के पथ पर आगे बढ़ना है तो उच्च शैक्षणिक मानकों को प्राप्त करने का निरंतर प्रयास बहुत जरूरी है।
 मैं समझता हूँ कि विश्वविद्यालय में सुन्दर और अच्छा माहौल होना चाहिए। शिक्षकों को सच्चे अर्थों में शिक्षा के प्रति समर्पित होना चाहिए। शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध मजबूत होना चाहिए। हमारे शिक्षकगण विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन करें ताकि विद्यार्थी अपने उद्देश्य से न भटकें।
 वैश्वीकरण के इस युग में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। विद्यार्थियों को हर हाल में गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध रहे तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास पर भी जोर देना बहुत जरूरी है। विद्यार्थी विभिन्न प्रतिस्पर्धा में सफलता हासिल करें, इसके लिए विश्वविद्यालय को प्रतिबद्ध होकर कार्य करना जरूरी है।
 विश्वविद्यालय में शोध के महत्व को समझते हुए इसके स्तर को उच्च करने का हर संभव प्रयास करना चाहिये, शोध में हमारे विद्यार्थियों में निहित इनोवेटिव आईडिया दिखना चाहिये ताकि समाज को उसका लाभ पहुँचे।
 भारत ऋषि-मुनियों का देश है। यहाँ जीने की कला-पद्धति भी धर्म की नींव पर आधारित है। अर्थात् जिस इंसान के पास विद्या है, वही झुकना भी जानता है और उसके अन्दर अहंकार लेशमात्र भी नहीं दिखता है, जैसे कि आप किसी फलदार वृक्ष को देख लीजिए, वृक्ष पर लगे फल इंसान के अन्दर उपस्थित विद्या, ज्ञान, परोपकार और सहनशीलता के प्रतीक हैं।
 मुझे बताया गया है कि कोल्हान विश्वविद्यालय ने एन०सी०सी० को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया है। साथ ही विश्वविद्यालय बी०सी०ए०, बी०बी०ए०, बी०एस.सी० आई०टी०, वाटर मैनेजमेंट, बी०एड०, एम०एड० आदि व्यावसायिक पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार सुलभ कराने योग्य बनाने की दिशा में प्रयासरत है।
 उच्च शिक्षा क्षेत्र में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कोल्हान विश्वविद्यालय के अधीन जमशेदपुर महिला महाविद्यालय को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया गया है। इस विश्वविद्यालय को झारखण्ड में पहला महिला विश्वविद्यालय बनने का गौरव हासिल होगा।
 महिला सशक्तीकरण सामाजिक विकास के लिए जरूरी है। शिक्षा सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है। हमारी बेटियां उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
 मैंने अधिकांश विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में यह देखा है कि स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों में लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक होती है। बेटियों का यह शानदार प्रदर्शन, भविष्य के विकसित भारत की सुनहरी तस्वीर प्रस्तुत करता है।
 मुझे प्रसन्नता है कि कोल्हान विश्वविद्यालय, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली, सिद्धू-कान्हु बिरसा विश्वविद्यालय, पुरुलिया, फकीर मोहन विश्वविद्यालय, बालेश्वर, श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, पुरी, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी आदि अनेक शैक्षणिक संस्थानों के साथ एम०ओ०यू० करके ज्ञान का आदान-प्रदान कर रहा है।
 किसी विश्वहविद्यालय की स्थाषपना और संचालन में पूरे समाज का योगदान होता है। इसलिए, विश्वयविद्यालयों को भी चाहिए कि वे पूरे समाज के प्रति अपनी जिम्मेैदारी निभाएं।
 समाज सेवा के महत्व को समझना और उसमें सक्रिय होना राष्ट्र-निर्माण के साथ-साथ आत्म-निर्माण के लिए भी जरूरी है। मातृ-ऋण, पितृ-ऋण, आचार्य-ऋण आदि ऋणों के साथ-साथ समाज-ऋण को चुकाने के लिए भी सभी को पूरी निष्ठा से तत्पर रहना चाहिए।
 कारपोरेट सोशल रिस्पॉसन्सि बिलिटी (सी०एस०आर०) की तरह विश्वाविद्यालयों को यूनिवर्सिटी सोशल रिस्पॉॉन्सिनबिलिटी की दिशा में सक्रिय होना चाहिए। यहाँ के विद्यार्थी नजदीक के गांवों और बस्ति्यों में लोगों के बीच कुछ समय बिताएं, उनकी समस्यारओं के समाधान में हाथ बंटाएं और उनके जीवन-स्तर में सुधार लाने का प्रयास करें।
 विद्यार्थी विशेष तौर पर स्वच्छता, साक्षरता, टीकाकरण और पोषण जैसी कल्यािणकारी योजनाओं के बारे में ग्रामवासियों में जागरूकता बढ़ा सकते हैं। विश्विविद्यालय अपने स्तार पर आस-पास के गांवों को गोद ले सकता है और उनकी प्रगति में सहभागी बन सकता है।
 दीक्षान्त समारोह के इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों से मैं यह कहना चाहता हूँ कि झारखण्ड प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय प्रदेश बनाने में आप सहभागी बनें। अपने उत्थान के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के उत्थान में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
 आप सभी विद्यार्थी सफलता के पथ पर हमेशा आगे बढ़ते रहें, इसके लिए मेरी शुभकामनाएं और आशीर्वाद सदा आपके साथ हैं।
जय हिन्द! जय झारखंड!
07 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने संत मेरी स्कूल, राँची में अध्ययनरत विराज माकन को रिवर्स ऑर्डर श्रेणी में गुणन तालिका में 80 से 1 को 10 मिनट 16 सेकंड में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में उपलब्धि हासिल करने हेतु बधाई व शुभकामनाएं दी। उन्होंने विराज को सम्मानित करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उक्त अवसर पर उसके माता शिल्पी माकन, पिता गगन माकन, दादा श्री सुभाष चंद्र माकन, दादी श्रीमती कृष्णा माकन, भाई विराट माकन मौजूद थे।
06 April 2022
राँची विश्वविद्यालय, राँची एवं विज्ञान भारती, झारखंड द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन-
 राष्ट्रीय सेवा योजना, राँची विश्वविद्यालय, राँची एवं विज्ञान भारती, झारखंड द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आकर मुझे अपार हर्ष हो रहा है।
 आज पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आज़ादी का अमृत महोत्सव का अर्थ है, आज़ादी के उपरांत उपलब्धियों के अमृत का आनन्द, आगामी योजनाओं के संकल्प को पूर्ण करने के जोश व जज्बे का अमृत, आज़ादी की ऊर्जा का अमृत, स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा का अमृत, आज़ादी का अमृत महोत्सव अर्थात् नए विचारों का अमृत, नए संकल्पों एवं परिकल्पनाओं का अमृत, आत्मनिर्भरता का अमृत।
 आज़ादी का अमृत महोत्सव भारतीय मनीषियों के ज्ञान-विज्ञान, चिन्तन व दर्शन का अमृत, भारतीय वैज्ञानिकों की व्यापक सोच व दृष्टि, उनकी अकूत उपलब्धियों का अमृत, जिन्होंने मानव जाति को सिंचित किया एवं स्वतंत्र भारत को समृद्ध किया। हमें अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों पर गर्व है।
 आजीविका के लिए कृषि की तकनीक को सीखकर मानव ने विज्ञान के साथ सांमजस्य स्थापित कर अपने जीवन को आगे बढ़ाया। हमारे जीवन के हर क्षेत्र में विज्ञान की उपस्थिति दर्ज़ है।
 हमारे भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी लगन और अथक परिश्रम से जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन पर हम देशवासियों को गर्व है। देश ने साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए। तकनीकी विकास ने आम लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाने की राह तैयार की।
 इस दौरान भारत ने न सिर्फ उपग्रहों का निर्माण किया, बल्कि चंद्रमा और मंगल पर अपने यान भेजे। परमाणु ऊर्जा केंद्र स्थापित किए और परमाणु हथियार बनाने की क्षमता भी हासिल की। मिसाइल के क्षेत्र में भी अपनी अद्भुत क्षमता का प्रदर्शन किया। अंतरिक्ष उपगृहों की मदद से हमने प्रकृति के स्वभाव एवं मौसम के मिजाज को भी जान लिया है।
 हम भारतवासियों के लिए यह गर्व की बात है कि हमारे देश ने प्राचीन काल से ही पूरी दुनिया को ज्ञान-विज्ञान का आधार दिया।
 सुश्रुत प्राचीन भारत के प्रसिद्ध चिकित्साशास्त्री तथा शल्य चिकित्सक थे। इन्हें ‘’शल्य चिकित्सा का जनक” माना जाता है। सुश्रुत ने प्रसिद्ध चिकित्सकीय ग्रंथ 'सुश्रुत संहिता' की रचना की थी।
 इस ग्रंथ में शल्य क्रियाओं के लिए आवश्यक यंत्रों व साधनों तथा उपकरणों आदि का विस्तार से वर्णन किया गया है। उन्होंने एक व्यक्ति की टूटी हुई नाक की आज की आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी के तर्ज पर लगभग 2500 साल पहले प्लास्टिक सर्जरी की और उनको सफलता मिली।
 ऋषि कणाद ने परमाणु के संबंध में विस्तार से लिखा है। अश्विन कुमार और ऋषि भारद्वाज अंतरिक्ष वैज्ञानिक थे।  भारत वैसे ही विश्व गुरु नहीं कहा जाता था। हमने दुनिया को अपने ज्ञान-विज्ञान से जीना सिखाया, मानव-कल्याण का मार्ग दिखाया। इतिहास में इसकी सुनहरी कहानी का उल्लेख किया गया है। तक्षशिला, नालंदा जैसे प्रख्यात व विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय थे, जहाँ पूरे विश्व के विद्यार्थी ज्ञान हासिल करने आते थे।
 आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, चरक, बौधायन आदि जैसे कई प्राचीन वैज्ञानिकों, विद्वानों, ऋषियों ने पूरे विश्व में ख्याति अर्जित की। ऐसे सभी महान वैज्ञानिकों के ग्रंथों पर शोध किया जाना चाहिए। विदेशों में इन वैज्ञानिकों के ग्रंथों पर शोध किया जाता रहा है।
 हमारे देश की समृद्ध ज्ञान-विज्ञान की उपलब्धियों के संदर्भ में हम सब जानते हैं कि भारत ने दुनिया को जीरो (शून्य) दिया, जिससे गिनती संभव हो सकी। शून्य दुनिया में होने वाले कुछ महान अविष्कारों में से एक है और इसका श्रेय भारत को जाता है। यदि शून्य का अविष्कार नहीं होता तो दशमलव प्रणाली नहीं होती। शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद ने दुनिया के सामने भारतीय संस्कृति और दर्शन की विशिष्टता को बताते हुए शून्य पर दिये गये व्याख्यान से पूरे विश्व को प्रभावित किया।
 भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियों से पूरे विश्व में अपनी सफलता का परचम लहराया है। श्री प्रफुल्ल चन्द्र राय, सलीम अली, श्रीनिवास रामानुजन, चन्द्रशेखर वेंकट रमन, होमी जहांगीर भाभा, जगदीश चन्द्र बोस, सत्येन्द्र नाथ बोस, डॉ० अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिकों का महान व्यक्तित्व सभी को प्रभावित करता है।
 पूर्व राष्ट्रपति व महान वैज्ञानिक भारत रत्न डॉ० ए०पी¬¬¬०जे० अब्दुल कलाम, जिन्हें मिसाइलमैन के नाम से याद किया जाता है, वे कहा करते थे कि सामने कोई परिस्थिति हो उसका सामना करो और अपने सपने को साकार करो।
 कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी क्षेत्र विशेष में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है, उसके लिए दूसरे क्षेत्रों में भी सब कुछ आसान और सहज हो जाता है। डॉ० ए०पी¬¬¬०जे० अब्दुल कलाम ने इस बात को चरितार्थ किया। भारतीय अन्तरिक्ष एवं देश को मिसाइल क्षमता प्रदान करने का श्रेय डॉ. कलाम को जाता है।
 आधुनिक भारतीय वैज्ञानिक अपनी कृतियों के कारण सदा याद किये जायेंगे, जिन्होंने भारत में विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। डॉ० अब्दुल कलाम, अनिल काकोडकर, बीरबल साहनी, होमी जहाँगीर भाभा, प्रेम चंद पाण्डेय, कैलाशनाथ कौल, श्रीराम शंकर अभ्यंकर, सी०एन०आर० राव, जयन्त विष्णु नार्लीकर जैसे अनेक वैज्ञानिक हैं, जिनका नाम सदा गर्व से लिया जायेगा।
 आज हमारी नजर जिधर जाती है, उधर ईश्वर की अनुपम विलक्षण दृष्टि में विज्ञान की प्रभुता और किरणें दिखई पड़ती है। आजादी का अमृत महोत्सव स्वाधीनता सेनानियों के महान त्याग व बलिदान के आलावे इन वैज्ञानिकों की देनों को याद करने का अवसर है, जो हमें गर्व का एहसास कराते हैं।
 हमारे वैज्ञानिक प्रगति की राह में निरंतर अग्रसर रहें और वैज्ञानिक उपलब्धियों से हम और समृद्ध हों, ऐसी मंगलकामना है और ऐसा मेरा विश्वास भी है।
जय हिन्द!
जय जवान! जय किसान!! जय विज्ञान!!!
06 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने नक्षत्र वन का निरीक्षण करते हुए |
06 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस से राँची के उपायुक्त श्री छवि रंजन एवं वरीय पुलिस अधीक्षक श्री सुरेन्द्र झा ने राज भवन में भेंट कर अगामी रामनवमी पर्व हेतु जिला प्रशासन द्वारा की जा रही तैयारियों से अवगत कराया।
04 April 2022
प्रकृति पर्व 'सरहुल' की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
03 April 2022
रमजान के पवित्र माह की आप सभी को हार्दिक बधाई। मैं सबकी खुशहाली एवं राष्ट्र की प्रगति की कामना करता हूँ।
02 April 2022
एन०यू०एस०आर०एल०, राँची के तृतीय दीक्षांत समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय के संबोधन:-
Ø मुझे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एण्ड रिसर्च इन लॉ, राँची द्वारा आयोजित इस तृतीय दीक्षांत सामारोह में आप सभी के बीच आकर अपार खुशी हो रही है।
Ø  सर्वप्रथम मैं सभी उपाधि ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देता हूँ। साथ ही इस अवसर पर मैं उनके शिक्षकों,अभिभावकों एवं उन सभी सदस्यों को बधाई देता हूँ जिनके कारण उन्होंने ये उपलब्धि हासिल की है।
Ø  आज पवित्र दिन है। आज से नवरात्र शुरू हो रहा है जो शक्ति का प्रतीक है। पहले लोगों की सोच थी कि लड़कियों को पढ़ाने से क्या होगा? पढ़-लिखकर ससुराल चली जायेगी। आज लड़कियों को लड़कों के मुकाबले ज्यादा गोल्ड मेडल मिले हैं। लड़कियाँ लड़कों से कम नहीं है।
Ø दीक्षांत समारोह एक ऐसा विशेष अवसर होता है, जिसमें विद्यार्थियों द्वारा अपने अध्ययन काल में की गई कड़ी मेहनत को लक्ष्यों की प्राप्ति व सफलता हासिल करने से जुड़ते हुए देखते हैं। इस यात्रा में हमारे विद्यार्थी कई असाधारण क्षणों का अनुभव करते हैं। यह समारोह अन्य अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का भी कार्य करता है।    
Ø मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि वर्ष 2010 में स्थापित इस विधि विश्वविद्यालय में देश भर से छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए आते हैं और यह जानकर हर्ष की अनुभूति हो रही है कि यहाँ के विद्यार्थियों ने विधि के क्षेत्र में इस विश्वविद्यालय एवं झारखंड राज्य को गौरवान्वित किया है।
Ø मुझे उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में यहाँ के विद्यार्थी समाज व देश में व्याप्त कानूनी समस्याओं के समाधान में अपना अमूल्य योगदान देने का कार्य करेंगे।
Ø विधि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे अधिवक्ताओं को तैयार करना होता है जो व्यावसायिक रूप से कुशल हों एवं गहन ज्ञान रखते हों। वे न केवल अधिवक्ता और न्यायाधीश बनें बल्कि जन-अपेक्षाओं को पूरा करने तथा भारत के संविधान की रक्षा करने के लिए तैयार हों। आज विधिक पेशे में उसी प्रकार प्रतिभावान लोग आकर्षित हो रहे हैं जिस प्रकार पहले चिकित्सा और इंजीनियरिंग के पेशे में होते थे।
Ø विधि व्यवसाय को हर उस समाज में नेक पेशा माना जाता है जहां कानून का शासन चलता। हमारे देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और बहुत से स्वतंत्रता सेनानी अधिवक्ता थे। वास्तव में, यह तर्क दिया जा सकता है कि हमारे नेताओं द्वारा अधिवक्ता के रूप में प्रशिक्षण ने हमारे राष्ट्रीय आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Ø हमारे स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश हुकूमत से तर्क, दलील तथा नैतिक साहस, जो एक अच्छे अधिवक्ता के महत्त्वपूर्ण हथियार हैं, का प्रयोग करते हुए, शांतिपूर्ण एवं अहिंसक तरीके से स्वतंत्रता, मौलिक अधिकार तथा लोकतंत्र की प्राप्ति का प्रयास किया गया था।
Ø अपने देश की स्वाधीनता आन्दोलन के इतिहास पर गौर करें तो देखेंगे कि इसमें बैरिस्टरों की अहम भूमिका थी। उन्होंने धन के पीछे न भाग राष्ट्रहित को सर्वोपरि समझा और देश के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया। संविधान निर्माताओं में बहुत से लोग ऐसे थे जिन्हें विधि का ज्ञान था।
Ø आजादी के बाद हमारे देश में कई ऐसे महान अधिवक्ता और न्यायाधीश हुए जिन्होंने संविधान के प्रभुत्व और अहमियत को बनाये रखने में अहम योगदान दिया। Ø प्रिय उपाधिधारकों, आपको निर्बलों का प्रतिनिधित्व करने तथा न्याय की प्राप्ति में उनकी सहायता करने के लिए हमेशा तत्पर और इच्छुक रहना चाहिए। मुझे आशा है कि आप सभी लोग निर्धनों को कानूनी सहायता प्रदान करने के कार्य को जीवन भर के लिए एक दायित्व के रूप में अपनायेंगे और निर्बलों की समस्याओं का समाधान करने का हर संभव प्रयास करेंगे।
Ø विधि के विद्यार्थियों को सामाजिक समस्याओं के प्रति हमेशा सजग और जागरूक रहने की जरूरत है।   Ø जीवन में कुछ पाने के लिए हमेशा मन में सीखने की इच्छा रखें क्योंकि ज्ञान का कोई अंत नहीं होता है। आप अच्छे इंसान बनें, अच्छा इंसान समाज के हर क्षेत्र में अच्छा ही होता है। Ø हमेशा से ही कहा जाता रहा है कि सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत का और कोई विकल्प नहीं होता है। कड़ी मेहनत ही आपको आपके जुनून और आपके कौशल को बढ़ाने में आपकी मदद करती है। आपको अपने जीवन में वास्तविक रूप में सफल होने के लिए असाधारण रूप से कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। 
Ø भारत का संविधान विश्व के सर्वश्रेष्ठ संविधानों में से एक है। सभी को संविधान का अच्छी तरह अध्ययन करना चाहिये। देश की राजनीतिक प्रणाली, इसकी संस्थाओं और प्रक्रियाओं को समझें। Ø भारत के संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे भारत की परिकल्पना की था जहाँ ‘‘कानून के समक्ष सब लोगों की समता’’ तथा ‘‘सबके लिए न्याय’’ दो ऐसे स्तंभ हैं, जो समाज के हर एक वर्ग के अधिकारों की रक्षा करेंगे। हमारे आदर्श संविधान की रक्षा करना आप सभी का दायित्व है।
Ø हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। हमारा संविधान उन आदर्शों का परिचायक है जिसका पालन कर हम एक आदर्श समाज की स्थापना कर सकते हैं। इसलिए हमें अपने संविधान में निहित आदर्शों और अधिकारों की रक्षा करनी होगी और इस कार्य में विधि के छात्रों का योगदान अत्यंत आवश्यक है।
Ø अधिवक्ताओं को इस देश में विशेष दर्जा हासिल है। अधिवक्ताओं का कर्तव्य अन्याय से लड़ना है, चाहे वह कहीं भी हो। अधिवक्ताओं को आपराधिक, निर्धनता, घरेलू हिंसा, जाति-भेद और शोषण के विभिन्न स्वरूपों के विरुद्ध बदलाव का नेतृत्व करना चाहिए।
Ø यदि आपको हिंसा, भ्रष्टाचार अथवा अत्याचार का समर्थन करने के लिए कहा जाए तो ना कहने की हिम्मत दिखाएं। अधिवक्ता के रूप में आपको लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए तथा एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का गंभीरता से निर्वहन करें।
Ø जब आप आपके मुवक्किलों के वैयक्तिक मामलों में उनका प्रतिनिधित्व कर रहे हों तब भी आपको सदैव विधि के शासन को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। हमारे नागरिकों के मौलिक अधिकारों के अभिरक्षक बनें।
Ø विद्यार्थियों और अधिवक्ताओं द्वारा विधिक शिक्षा को आजीविका के साधन से कहीं अधिक माना जाना चाहिए। उन्हें निरंतर यह चिंतन करने की जरूरत है कि उनके कार्य जनसाधारण को कैसे प्रभावित करें?
Ø प्यारे विद्यार्थियो, मैं आप सभी को आपकी सफलता हेतु बधाई देता हूँ। आप शीघ्र ही विधिक पेशे के कॉरपोरेट विधि, न्यायिक सेवा आदि जैसी विभिन्न शाखाओं को अपनाएंगे। Ø आप चाहे कोई भी विधिक शाखा चुनें आपकी सफलता की आधारशिला सभी के मौलिक अधिकारों की रक्षा, नागरिक स्वतंत्रता तथा गरीबों/निर्धनों के अधिकारों की प्राप्ति पर स्थापित होनी चाहिए। नि:स्वार्थ जन-सेवा के उच्च आदर्शों के प्रति स्वयं को समर्पित करें। अन्याय के खिलाफ संघर्ष करें।
Ø एक बार पुनः आप सभी के उज्ज्वल भविष्य हेतु हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ।
जय हिन्द!
01 April 2022
माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने आज राज भवन के दरबार हॉल में विभिन्न विद्यालयों के छात्र/छात्राओं के साथ दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम से प्रसारित 'परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के तहत माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा छात्र/छात्राओं, अभिभावकों एवं शिक्षकों के साथ किये गये संवाद को दूरदर्शन चैनल पर देखा व सुना। कार्यक्रम समाप्ति के उपरांत उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों से कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के विचार हमारे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी हैं। आज माननीय प्रधानमंत्री जी ने 'परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के द्वारा पूरे देश के बच्चों को ज्ञान देने का कार्य किया है तथा तनाव को दूर करने का संदेश दिया है। जिन बच्चों के मन में निराशा थी, उनके मन की निराशा को दूर किया है। राज्यपाल महोदय ने बच्चों से कहा कि मन में निराशा नहीं होनी चाहिए। निश्चितरुपेण, आज के इस कार्यक्रम से हमारे छात्र/छात्राओं के मनोबल में वृद्धि हुई है। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री जी को इस कार्य हेतु अत्यंत बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने छात्र/छात्राओं में उत्साह का संचार किया है तथा प्रोत्साहित भी किया है।
माननीय राज्यपाल ने सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के उपरांत राज भवन आए छात्र/छात्राओं ने राज भवन उद्यान का भ्रमण किया तथा राज भवन उद्यान की खूबसूरती की सराहना की।